
चीन ने पिछले एक साल से भी कम वक्त में दो बार राफेल लड़ाकू विमानों के साथ वॉरगेम किया है। इससे साफ पता चलता है कि चीन की कोशिश भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल राफेल लड़ाकू विमानों की काट खोजना है। ताजा अभ्यास चीनी वायुसेना ने अपने जे-16 फाइटर जेट्स के साथ मिस्र में एक सैन्य अभ्यास में किया है जबकि इससे पहले जे-16 और राफेल के बीच एक नकली अभ्यास हेनान प्रांत के जुचांग नाम के जगह पर हुआ था।
बीजिंग ने आठ J-16 फाइटर्स को फ्रांस में बने छह राफेल जेट्स के खिलाफ उतारकर एक हाई-स्टेक्स हवाई लड़ाई का सिमुलेशन किया और हैरानी की बात यह है कि इस मुकाबले का फुटेज भी जारी किया। वीडियो में PLAAF के J-16 लड़ाकू विमानों को असल हालात में मिस्र के MiG-29 और राफेल फाइटर्स के खिलाफ हवाई युद्ध का अभ्यास करते हुए दिखाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि भारत राफेल और मिग-29 दोनों का इस्तेमाल करता है और राफेल का पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल किया गया था।
क्या राफेल लड़ाकू विमान की काट खोज रहा चीन? – चीन के लिए यह एक दुर्लभ मौका था कि वह राफेल फाइटर जेट्स के बारे में जान सके जिनका इस्तेमाल उसका पड़ोसी और ‘दुश्मन’ भारत करता है। इंडोनेशिया ने भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ये फ्रांसीसी जेट खरीदे हैं। बीजिंग के साथ उसके दोस्ताना संबंध हैं और वह J-10C एयरक्राफ्ट खरीदने पर भी विचार कर रहा था। दूसरी तरफ भारत 114 नये F4/F5 राफेल वेरिएंट खरीदने की योजना बना रहा है। भारतीय नौसेना ने भी 26 राफेल-M जेट का ऑर्डर दिया है।
मिस्र में हुए अभ्यास से चीनी पायलटों को राफेल की उड़ान की खूबियों, बुनियादी हथियारों के कॉन्फ़िगरेशन, मीडियम और क्लोज-रेंज में गतिशीलता, लड़ाई के दौरान सेंसर के व्यवहार और असल हालात में चीनी सिस्टम के साथ इसकी रणनीति कैसे काम करती है यह समझने में मदद मिली होगी। हालांकि ये भारतीय राफेल नहीं हैं इसलिए हथियारों के कॉन्फ़िगरेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सुइट, पायलट ट्रेनिंग और सपोर्ट सिस्टम में कुछ अंतर हो सकता है।
फिर भी परफॉर्मेंस और रणनीति के बारे में कोई भी असल डेटा भले ही वह अधूरा हो काम का तो होता ही है। और इससे उस देश को लड़ाई में फायदा हो सकता है जो इस जेट का इस्तेमाल करते हैं जैसे कि भारत। ऐसा लगता है कि चीन सिर्फ़ अपनी क्षमता ही नहीं बढ़ा रहा है बल्कि दुनिया के कुछ बेहतरीन लड़ाकू विमानों के मुकाबले अपनी क्षमता को परख भी रहा है।
चीन आखिर राफेल के खिलाफ बार-बार क्यों कर रहा J-16 की प्रैक्टिस? – भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन और मिलिट्री कमेंटेटर जॉनसन चाको ने यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में कहा है ‘चीनी सेना मिस्र के राफेल विमानों की क्षमताओं को परखने की कोशिश करेगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मिस्र कितनी जानकारी साझा करता है। वे राफेल के खिलाफ रणनीति बना सकते हैं। आखिरकार मशीन को चलाने वाला इंसान ही सबसे ज्यादा मायने रखता है। हमने IAF और USAF के बीच हुई पहली ही एक्सरसाइज़ में एयर कॉम्बैट में अमेरिकी F-15 विमानों को हरा दिया था। हमें हराने के लिए उन्होंने F-22 को तेजी से लाने का फैसला किया। यह बात अमेरिकी मीडिया में भी छपी थी।’
आपको बता दें कि J-16 एक भारी, दो इंजन वाला फाइटर जेट है जिसे लंबी दूरी के ऑपरेशन के लिए बनाया गया है। यह लंबी दूरी तक मार करने वाले हवा-से-हवा में मार करने वाले और स्ट्राइक हथियार इस्तेमाल कर सकता है, इसमें एक शक्तिशाली रडार है और यह उन मिशनों के लिए बहुत अच्छा है जिनमें ज्यादा फायरपावर और रेंज की जरूरत होती है।
Home / News / चीन ने एक साल में दूसरी बार किया राफेल के साथ वॉरगेम, भारतीय वायुसेना से खौफ में ड्रैगन?
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