
लद्दाख में जारी गतिरोध को हल करने के लिए भारत के साथ डिप्लोमेटिक और सैन्य स्तर पर बातचीत के दौरान भी चीन अपनी नापाक चाल से बाज नहीं आ रहा है। हाल में ही ली गई सैटेलाइट इमेज से खुलासा हुआ है कि चीन ने लेह से 382 किलोमीटर दूर होटान एयरबेस पर अपने लड़ाकू विमान और मिसाइलों के नए जखीरों को तैनात किया है।
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट Detresfa की सैटलाइट तस्वीरों के अनुसार, चीन ने शिनजियांग प्रांत में होटान एयरबेस को भारत के खिलाफ रणनीतिक रूप से मजबूत कर दिया है। यहां फाइटर एयरक्राफ्ट के अलावा, अर्ली वार्निंग अवाक्स एयरक्राफ्ट और एयर डिफेंस यूनिट्स की तैनाती की गई है।
इन हथियारों को चीन ने किया तैनात
इस एयरपोर्ट पर जिन एयरक्राफ्ट की तैनाती की गई है उनमें शेनयांग जे-8 इंटरसेप्टर एयरक्राफ्ट और शेयनांग की फाल्कर शामिल हैं। इसके अलावा जिस अवाक्स को यहां तैनात किया गया है वह शनाक्सी वाई-8जी और केजे-500 हैं।
कितना शक्तिशाली है शेनयांग जे-8
शेनयांग जे-8 इंटरसेप्टर मूल रूप से रूस से चुराई गई डिजाइन पर आधारित है। सिंगल सीटर यह प्लेन तेजगति से अत्याधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है। हालांकि, इस विमान की ताकत को लेकर ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। अधिक ऊंचाई पर उड़ने के कारण यह प्लेन आधे फ्यूल और आधे हथियार से ही हमला कर सकता है।
वायु सेना की ताकत में भारत की स्थिति मजबूत
बेलफर सेंटर के मार्च में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, भारत के पास लगभग 270 लड़ाकू विमान और 68 ग्राउंड अटैक फाइटर जेट हैं। वहीं, भारत ने पिछले कुछ दशकों में चीन से लगी सीमा पर कई हवाई पट्टियों का निर्माण किया है जहां से ये फाइटर जेट आसानी से उड़ान भर सकते हैं। वहीं, इस स्टडी के अनुसार, चीन के पास 157 फाइटर जेट्स और एक छोटा ड्रोन का बेड़ा भी है। इस स्टडी में बताया गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स भारत से लगी सीमा क्षेत्र में आठ ठिकानों का उपयोग करती है, लेकिन इनमें से अधिकांश नागरिक हवाई क्षेत्र हैं।
रूस ने युद्धाभ्यास को कॉकसस वॉरगेम से जोड़ा
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल में ही सेना को आदेश दिया था कि वह देश की सुरक्षा तैयारिकों को जांचने के लिए यूक्रेन की सीमा के नजदीक युद्धाभ्यास करे। रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने युद्धाभ्यास का बचाव करते हुए कहा कि यह ड्रिल सितंबर में होने वाले कॉकसस 2020 वॉरगेम की एक्सरसाइज का हिस्सा है। इससे हम अपने सैनिकों के तैयारिकों को जांच रहे हैं।
यूक्रेन ने भी किया युद्धाभ्यास का ऐलान
इधर रूसी युद्धाभ्यास से तमतमाए हुए यूक्रेन ने भी एक युद्धाभ्यास करने का ऐलान किया है। यूक्रेन के रक्षामंत्री एंड्री तरन ने घोषणा करते हुए कहा कि उनका देश भी इसी महीने एक मिलिट्री ड्रिल का आयोजन करेगा। वह इस युद्धाभ्यास में नाटों सदस्य देशों को भी आमंत्रित करने की योजना बना रहा है। अगर यूक्रेन के युद्धाभ्यास में नाटों सदस्य देश हिस्सा लेते हैं तो इस क्षेत्र की शांति और स्थिरता को खतरा पैदा हो सकता है।
यूक्रेन ने रूस पर लगाया हमले की साजिश रचने का आरोप
यूक्रेन के रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि रूस हमारे देश पर आक्रमण करने के लिए कॉकसस 2020 वॉर गेम्स को कवर से रूप में इस्तेमाल कर रहा है। क्योंकि इस क्षेत्र में रूसी समर्थित अलगाववादी पहले से ही यूक्रेन की सेना के साथ युद्ध लड़ रहे हैं। साल 2014 में रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया पर हमला कर उसे कब्जे में ले लिया था।
डेढ़ लाख सैनिक और सैकड़ों युद्धपोत ले रहे हिस्सा
रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि इस युद्धाभ्यास में रूसी सेना के उत्तरी और पैसिफिक फ्लीट्स के एयरबॉर्न ट्रूप और मरीन इनफैंट्री सहित लगभग डेढ़ लाख सैनिक हिस्सा लेंगे। इस महायुद्धाभ्यास में 400 से ज्यादा लड़ाकू विमान और 100 से ज्यादा जंगी युद्धपोत भी शामिल होंगे।
यूक्रेन रूस में तनाव बढ़ना तय
रूसी सेना ने कहा कि इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य देश की दक्षिण और पश्चिमी सीमा की सुरक्षा तैयारियों को जांचना है। हाल में ही इस क्षेत्र में अमेरिका के सैनिकों की तैनाती और सेंट पीटर्सबर्ग के आसपास बाल्टिक सी एरिया में अमेरिकी और यूरोपीय युद्धपोतों की आवाजाही से तनाव बढ़ गया है। इस कारण रूस ने भी पहली बार बाल्टिक सी एरिया में अपने परमाणु पनडुब्बी को तैनात किया है।
भारतीय लड़ाकू विमान चीन के मुकाबले ज्यादा प्रभावी
बेलफर सेंटर की इस स्टडी के अनुसार, भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 और सुखोई एसयू 30 लड़ाकू विमान को चीन के जे-10, जे-11 और एसयू-27 लड़ाकू विमानों पर बढ़त हासिल है। चीन ने भारत से लगी सीमा पर इन्हीं विमानों को तैनात किया है। भारतीय मिराज 2000 और एसयू -30 जेट्स ऑल-वेदर, मल्टी-रोल विमान हैं जबकि चीन का जे-10 ही ऐसी योग्यता रखता है। बेलफर की स्टडी बताती है कि चीन ने अपने पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों को अमेरिका के कथित खतरे से बचाने के लिए मजबूत किया है। इस कारण पश्चिमी क्षेत्र में उसके चार एयरफील्ड कमजोर हुए हैं।
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