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‘CJP प्रदर्शन एक रिमाइंडर लेकिन मोदी करेंगे जोरदार वापसी’, Gen G आंदोलन पर बोले अमेरिकी एक्सपर्ट


दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते महीने हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शनों ने ना सिर्फ देश बल्कि दुनिया का ध्यान खींचा है। साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल कुगलमैन ने प्रदर्शन पर अपने विश्लेषण में माना है कि इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है। यह राजनीतिक पार्टियों और सियासी जानकारों के लिए एक बड़ा सबक है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा है कि नरेंद्र मोदी की सरकार इन प्रदर्शन के नतीजों से उबर जाएगी।
अमेरिकी एक्सपर्ट माइकल कुगलमैन का कहना है कि भारत का कॉकरोच मूवमेंट नरेंद्र मोदी के दौर में सामने आए सरकार-विरोधी सबसे बड़े कैंपेन में से एक है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह उनके 12 साल के राज (2014 से चल रही सरकार) में उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
‘राजनीति में कुछ भी कमजोर नहीं’ – माइकल कुगलमैन लिखते हैं, ‘यह दिल्ली के लिए एक रिमाइंडर है कि पॉलिटिक्स में कुछ भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। हालांकि इसकी आंच शीर्ष तक पहुंचती नहीं दिख रही है। भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी मजबूत हैं और वे वापसी करते हुए कॉकरोच की चुनौती से बच निकलेंगे। हालांकि इस आंदोलन ने उन्हें पहले के मुकाबले राजनीतिक रूप से कमजोर किया है।’
माइकल कुगेलमैन ने इस बात का भी विश्लेषण किया है कि भारत और दूसरे पड़ोसियों की तरह पाकिस्तान में युवा सड़कों पर क्यों नहीं उतर रहे हैं। माइकल ने कहा है कि पाकिस्तान में अलग-अलग चल रहे आंदोलन आपस में एकजुट नहीं हो पा रहे हैं। सरकार के खिलाफ कई साझा शिकायतों के बावजूद लोगों के साथ ना आने की वजह सामाजिक विभाजन का होना है। यह जन-आंदोलन के ना होने की बड़ी वजह है।
जंतर-मंतर चर्चा में क्यों – दिल्ली के जंतर मंतर पर एक महीने से ज्यादा चला आंदोलन 25 जुलाई को खत्म हो गया है। हालांकि अभी भी इसकी चर्चा लगातार हो रही है। जंतर-मंतर पर यह विरोध प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और वामपंथी छात्र संगठनों की अगुवाई में किया गया।। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ था।
प्रदर्शन के दौरान ज्यादातर एक्सपर्ट राय थी कि नरेंद्र मोदी सरकार के रिकॉर्ड को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा नहीं लिया जाएगा। 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे के ऐलान ने देश-दुनिया के कई एक्सपर्ट को चौंकाया। कई जानकारों ने इसे नरेंद्र मोदी के कमजोर पड़ने की तरह देखा है। वहीं माइकल कुगलमैन समेत कई एक्सपर्ट मान रहे हैं कि ये एक झटका हो सकता है लेकिन सरकार इससे बाहर आ जाएगी।