
ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च होने के बाद एक साल में इंडियन मिलिट्री में भी काफी बदलाव आए है। ऑपरेशन सिंदूर से कई सबक लिए गए और उन्हें लागू भी किया गया। भारतीय सेना में काफी संरचनात्मक बदलाव हुए तो एयरफोर्स में अलग-अलग प्लैटफॉर्म को जल्दी शामिल करने पर जोर दिया गया। इंडियन नेवी में तब से अब तक 9 नए वॉरशिप कमिशन हो गए है। साथ ही पांच की डिलिवरी हो गई है, जो जल्दी ही नेवी में शामिल हो जाएंगे।
सेना में भैरव से लेकर अश्नि तक – पिछले एक साल में सेना ने खुद को बदलते युद्ध के स्वरूप के अनुसार ढालने की दिशा में कई कदम उठाए है। सेना ने नई यूनिट और फॉर्मेशंस बनाए है। ये देखकर बदलाव किए गए है कि आने वाले वक्त का युद्ध सिर्फ पारंपरिक नहीं होगा, बल्कि इसमें ड्रोन, सटीक हमले, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रियल टाइम जानकारी की अहम भूमिका होगी।
पिछले एक साल में सेना ने अपनी सटीक मारक क्षमता को काफी मजबूत किया है। लंबी दूरी तक लक्ष्य पर नजर रखने और सही समय पर हमला करने वाले लॉन्ग-एंड्योरेंस लॉइटरिंग म्यूनिशन (मंडराने वाला ड्रोन हथियार), कामेकाजी ड्रोन और लेजर-गाइडेड रॉकेट्स को शामिल किया गया है। बड़ी संख्या में टेदरड ड्रोन (तार से जुड़ा निगरानी ड्रोन) शामिल किए गए है जो लगातार आसमान में रहकर इलाके की निगरानी करते है।
नई बटालियन का गठन – सेना में भैरव बटालियन बनाई गई है। ये लाइट कॉम्बैट बटालियन है। इनमें पैदल सेना के अलावा आर्टिलरी, एयर डिफेंस, सिगनल के भी सैनिक है। इसमें कॉम्बैट और कॉम्बैट सपोर्ट सब एक साथ है। सेना में रुद्र ब्रिगेड भी बनाई जा रही है।
रूद्र ब्रिगेड में इंफेंट्री के साथ ही आर्टिलरी, जरूरत के हिसाब से आर्ड या दूसरी आर्म की भी यूनिट हैं। छोटे इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप भी बनाए जा रहे हैं। भारतीय सेना की हर पैदल सेना बटालियन में अश्नि प्लाटून बना दी गई है। ये ड्रोन प्लाटून है।
पारंपरिक आर्टिलरी रेजिमेंट में से कुछ रेजिमेंट को शक्तिबाण रेजिमेंट में तब्दील किया जा रहा है। जहां पारंपरिक आर्टिलरी रेजिमेंट में तोप होती है वहीं शक्तिबाण रेजिमेंट में ड्रोन, स्वॉर्म ड्रोन और लॉइटरिंग एम्युनिशन है। जिससे इनकी रेंज बढ़ती है।
एयरडिफेंस से लेकर 24 घंटे निगरानी तक – ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट हमलो को भारत के एयर डिफेस सिस्टम ने समय रहते ट्रैक कर नाकाम किया। पहले अलग-अलग रडार की जानकारी ऑपरेटर को मैन्युअली एनालाइज करनी पड़ती थी। ‘आकाशतीर’ सिस्टम सभी रडार के डेटा को रियल टाइम में जोड़कर पूरी तस्वीर दिखाता है, जिससे तुरंत फैसला लेना आसान है। तब इसका 60% काम पूरा हुआ था, अब 80% काम हो चुका है। वहीं, 24 घंटे निगरानी के लिए हाई एल्टीट्यूट शूडो सैटेलाइट और स्वदेशी ‘सुदर्शन चक्र’ मिशन पर भी काम जारी है।
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