Wednesday , September 2 2026 5:40 PM
Home / News / ‘औरतें बाहर निकलीं तो भारी तबाही होगी’, बयान को मौलाना रशीदी का समर्थन; प्रियंका चतुर्वेदी ने किया करारा पलटवार

‘औरतें बाहर निकलीं तो भारी तबाही होगी’, बयान को मौलाना रशीदी का समर्थन; प्रियंका चतुर्वेदी ने किया करारा पलटवार


शेख अबूबकर अहमद के महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयान पर घमासान छिड़ गया है। अबूबकर अहमद की चारों ओर से हो रहीं आलोचनाओं के बीच ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी ने उनके बयान का समर्थन दिया है। मौलाना रशीदी ने कहा कि देश में जब तक इस्लामी कानून लागू नहीं होंगे, तब तक महिलाएं सुरक्षित नहीं होंगी। उन्होंने महिलाओं के घर से बाहर निकलकर काम करने और पुरुषों के साथ हर क्षेत्र में बराबरी से काम करने की सोच पर भी सवाल उठाए। अब साजिद रशीदी के बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी ने जबरदस्त पलटवार किया है।
शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साजिद रशीदी का वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा, ‘मनुवादी सोच, अरे रुको नहीं। ब्राह्मणवादी पितृसत्ता। अरे रुको नहीं।’
प्रियंका चतुर्वेदी का कटाक्ष – उनका यह बयान महिलाओं की भूमिका को लेकर दिए गए राशिदी के विचारों पर सीधे कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है। प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने पोस्ट में बिना विस्तार से बताए यह संकेत दिया कि महिलाओं को घर तक सीमित रखने वाली सोच को किसी एक धार्मिक या सामाजिक पहचान के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
क्या था मौलाना साजिद रशीदी का बयान? – मौलाना साजिद रशीदी ने सोमवार को केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के महिलाओं को लेकर दिए गए बयान पर कहा कि अगर महिलाएं अपनी सुरक्षा के लेकर सचेत हो जाती हैं, तो इसमें दिक्कत क्या है? महिलाएं जिस तरह से खुद को प्रदर्शित कर रही हैं, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जो घटनाएं हो रही हैं, उस पर समाज को सोचना चाहिए।
कांवड़ यात्रा का जिक्र करते हुए मौलाना ने कहा कि यह एक धार्मिक यात्रा है और सरकार की ओर से जगह-जगह टेंट लगाए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां लड़कियां नाचती हैं। लड़कियों को अपनी सुरक्षा और सम्मान के लिए कुछ सावधानियां बरतने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए।
शेख अबूबकर अहमद के बयान का समर्थन – उन्होंने कहा कि शेख अबूबकर अहमद ने महिलाओं को कैद में रहने के लिए नहीं कहा है। पर्दे में रहने की बात को महिलाओं की आजादी छीनने से जोड़ना उचित नहीं है। आजादी के नाम पर महिलाओं को घरों से बाहर निकलने और कार्यालयों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि दूसरी ओर उनके पहनावे और सार्वजनिक स्थानों पर व्यवहार को लेकर भी समाज में बहस होती है। दोनों तरफ से सोच बदलने की जरूरत है।
मौलाना रशीदी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए सख्त कानून जरूरी है। बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। स्लीपर बस में 16 साल की नाबालिग के साथ गैंगरेप की घटना को मौलाना साजिद रशीदी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि निर्भया कांड के बाद तस्वीर नहीं बदली है। छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं।
दुष्कर्म के मामले में कड़ी सजा की मांग – उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई मामलों में आरोपी जेल से बाहर आ जाते हैं और उन्हें जमानत मिल जाती है। उन्होंने देश में दुष्कर्म के मामलों में सख्त कानून की मांग की और कहा कि दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
भारत में इस्लामिक कानूनी की मांग – इस्लामिक कानूनों की सख्ती का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे कानूनों पर भी विचार किया जाना चाहिए। क्योंकि, इससे बड़ा इलाज नहीं है। समाज में बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। अगर सख्त कानून बन जाए तो उनकी हिफाजत होगी। मैं भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की बात नहीं कर रहा हूं। मौलाना रशीदी ने इस्लामिक देशों को लेकर दावा किया कि वहां सख्त कानून होने के कारण बलात्कार और चोरी जैसी घटनाएं नहीं होती हैं। उन्होंने उत्तराखंड में मदरसों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई को लेकर कहा उत्तर प्रदेश के बाद वहां भी ऐसी कार्रवाई देखने को मिल रही है। मुसलमानों को निशान बनाना ठीक नहीं है।
क्या था शेख अबूबकर अहमद का बयान? – शेख अबूबकर अहमद ने कोच्चि में आयोजित केरल मुस्लिम जमात के ‘हुब्बुर रसूल’ सम्मेलन में कहा था कि महिलाओं को घर की चारदीवारी में रहना चाहिए और दावा किया था कि उनके सार्वजनिक जीवन में आने से ‘भारी तबाही’ होगी। अबूबकर ने यह भी कहा था कि महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर जाने से रोकना उनके सम्मान के लिए ही है।
उन्होंने दावा किया कि इस्लाम ने पर्दा प्रथा इसलिए लागू की थी क्योंकि सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के आने से बुरे नतीजे हो सकते हैं, और उन्होंने कहा कि कुरान भी यही सिखाता है। उनके ये बयान समस्था के कांथापुरम गुट की ओर से पहले जारी किए गए एक सर्कुलर को लेकर मचे विवाद के बीच आए हैं। इस सर्कुलर में निर्देश दिया गया था कि महिलाएं सार्वजनिक सड़कों या सार्वजनिक जगहों पर ऐसे पुरुषों के साथ न दिखें जिनसे उनका कोई पारिवारिक रिश्ता न हो।
इस सर्कुलर की भारी आलोचना और सामाजिक विरोध हुआ था, खासकर तब जब लड़कियों और महिलाओं ने पैगंबर दिवस के जश्न की रैलियों में हिस्सा लिया था। ऐसे बयान देने के उनके अधिकार पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए, उन्होंने कहा कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने धर्म का गहराई से अध्ययन किया है और धार्मिक रीति-रिवाजों से जुड़े मामलों में मुस्लिम समुदाय का मार्गदर्शन करना उनकी जरूरी जिम्मेदारी है।