Friday , September 4 2026 4:57 PM
Home / News / भोटेकोशी नदी बाढ़ के लिए भारत-चीन से हर्जाना मांगने से पलटा नेपाल, विदेश मंत्री बोले- कोई इरादा नहीं

भोटेकोशी नदी बाढ़ के लिए भारत-चीन से हर्जाना मांगने से पलटा नेपाल, विदेश मंत्री बोले- कोई इरादा नहीं


नेपाल भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के लिए भारत, चीन और अमेरिका से हर्जाना मांगने के बयान से पलट गया है। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि उनका देश किसी दूसरे देश से ‘जलवायु न्याय मुआवजे’ की मांग नहीं कर रहा है। इससे पहले खनाल ने कहा था कि चीन, अमेरिका और भारत को मुआवजा देना चाहिए, क्योंकि वे CO2 का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाले देश हैं। नेपाल का आरोप है कि भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ जलवायु परिवर्तन के कारण आई थी।
जलवायु न्याय मुआवजा नहीं मांगेगा नेपाल – नेपाल ने चीनी दूतावास ने बताया कि नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने चीनी राजदूत झांग माओमिंग से कहा कि काठमांडू, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के लिए चीन या अन्य देशों से “जलवायु न्याय मुआवजा” की मांग नहीं कर रहा है। बैठक में खनाल ने चीन की आपातकालीन सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। नेपाल में चीनी दूतावास के अनुसार, झांग ने कहा कि भीषण भूस्खलन आपदा के बाद से चीन ने नेपाल के आपदा राहत प्रयासों में विभिन्न रूपों में सहयोग दिया है।
नेपाली विदेश मत्री ने पहले क्या कहा था? – इससे पहले कांतिपुर टीवी के ‘फायरसाइड’ कार्यक्रम में इंटरव्यू के दौरान नेपाली विदेश मंत्री खनाल ने कहा था कि नेपाल आपदा के बाद दी जाने वाली सहायता को केवल मानवीय सहायता या द्विपक्षीय अनुदान के रूप में देखने के बजाय जलवायु न्याय और मुआवजे की दिशा में अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। खनाल ने कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान नगण्य है, लेकिन हिमालयी पर्यावरण में बदलाव और लगातार विनाशकारी आपदाओं सहित जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम भुगत रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को जलवायु क्षतिपूर्ति के लिए औपचारिक दावा भेजा है और नेपाल इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा।
नेपाल का क्या तर्क है? – नेपाल लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि वैश्विक उत्सर्जन में अपेक्षाकृत कम योगदान देने वाले देश जलवायु परिवर्तन के परिणामों से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों में शामिल हैं। उनका यह भी दावा था कि नेपाल सरकार हिमालय की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है और चेतावनी दे रही है कि ग्लेशियरों का पिघलना और पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों का विघटन नेपाल से कहीं अधिक दूर तक जल सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।