
नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने अपने कार्यकाल के दौरान वित्तीय आचरण से संबंधित आरोपों के बाद बुधवार को इस्तीफा दे दिया। गुरुंग का इस्तीफा एक विवादास्पद व्यवसायी के साथ उनके कथित व्यापारिक संबंधों और शेयरों के लेन-देन को लेकर बढ़ती आलोचनाओं के बीच आया है। उन्हें 27 मार्च को गृह मंत्री नियुक्त किया गया था। इससे पहले बाले न शाह ने पद का दुरुपयोग कर पत्नी को लाभ पहुंचाने के आरोप में श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह को बर्खास्त कर दिया था। इस बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक महीने पहले गठित सरकार में दो मंत्रियों के भ्रष्टाचार के आरोप में इस्तीफे ने पीएम बालेन शाह की छवि को नुकसान पहुंचाया है।
ब्रह्मा चेलानी ने बालेन शाह पर साधा निशाना – भारतीय कूटनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने एक्स पर लिखा, “नेपाल सरकार की भ्रष्टाचार-विरोधी छवि को झटका: 27 मार्च को सत्ता संभालने के बाद से, प्रधानमंत्री बालेन्द्र “बालेन” शाह के नेतृत्व वाली नेपाल की नई सरकार को शुरुआती “बढ़ती चुनौतियों” और बाधाओं का सामना करना पड़ा है। आज गृह मंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा इस नई सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। जिस सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति “जीरो टॉलरेंस” के वादे पर भारी जीत हासिल की थी, उसके गृह मंत्री — जो कानून-व्यवस्था के प्रमुख होते हैं — का मनी-लॉन्ड्रिंग के एक संदिग्ध व्यक्ति से वित्तीय संबंधों के चलते इस्तीफा देना, उसकी नैतिक साख को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।”
बालेन शाह का अनुभवहीनता पर तंज – वहीं,IDSA की कार्यकारी परिषद के पूर्व सदस्य और जेएनयू-बीएचयू समेत कई विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर रह चुके सुख देव मुनि ने एक्स पर लिखा, “महज 35 दिनों के भीतर, नेपाली प्रधानमंत्री बालेन को अपने दो मंत्रियों को विदा करना पड़ा। यह उनके सहयोगियों के चयन में उनकी अनुभवहीनता को उजागर करता है। योग्य और सक्षम उम्मीदवारों के वादे से परे जाकर, उन्होंने ऐसे कैबिनेट सहयोगियों को चुना जो उनके पसंदीदा और उनके इशारों पर चलने वाले थे।”
सुदन गुरुंग ने इस्तीफे को लेकर क्या कहा – सुदन गुरुंग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा कि उन्होंने अपने वित्तीय आचरण से संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पद पर रहते हुए हितों के टकराव से बचने के लिए पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा, “मेरे लिए, पद से बढ़कर नैतिकता है, और जनविश्वास से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। देश में ‘Gen-Z’ आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, ने भी यही संदेश दिया है कि सार्वजनिक जीवन पाक-साफ होना चाहिए और नेतृत्व जवाबदेह होना चाहिए।” गुरुंग ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा “अगर कोई मेरे 46 भाइयों और बहनों के खून और बलिदान से बनी सरकार पर सवाल उठाता है, तो उसका जवाब नैतिकता है।”
दीप कुमार साह पर क्या आरोप थे – नेपाल के पूर्व श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पत्नी का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उन्हें स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में सदस्य के रूप में पुनर्नियुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई थी। आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने साह के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। साह को बर्खास्त करने के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह ने श्रम मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार अपने पास ले लिया है।
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