
ऑकलैंड. न्यूजीलैंड की संसद ने घरेलू हिंसा से पीड़ित नौकरीपेशा महिलाओं को साल में 10 दिन अतिरिक्त छुट्टी देने का कानून पास किया है। ऐसा इसलिए, ताकि वह पेशी के लिए कोर्ट जा सके, पति के साथ सुलह और बच्चों पर ध्यान दे सके। न्यूजीलैंड इस कानून को पारित करने वाला पहला देश है। संसद में कानून के पक्ष में 63 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 57 वोट डाले गए।
बिल को पेश करने वाले ग्रीन पार्टी के सांसद जैन लोगी ने कहा, न्यूजीलैंड दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल है, जहां घरेलू हिंसा की दर सबसे ज्यादा है। यहां औसतन हर चार मिनट में पुलिस घरेलू हिंसा का एक केस दर्ज करती है। पारिवारिक हिंसा की वजह से न्यूजीलैंड को हर साल 4.1 से सात अरब डॉलर तक का नुकसान उठाना पड़ता है।
छुट्टी के लिए नहीं देना पड़ेगा कोई सबूत: कानून के मुताबिक, घरेलू हिंसा की शिकार महिला को छुट्टी के लिए अपनी स्थिति का सबूत नहीं देना पड़ेगा। साथ ही, पीड़ित महिला अपनी सुरक्षा के लिए कंपनी से मनपसंद जगह पोस्टिंग करने और ईमेल एड्रेस या कॉन्टेक्ट की जानकारी बदलने की मांग भी कर सकती है। विपक्षी नेशनल पार्टी ने इस बिल का विरोध किया। पार्टी के प्रवक्ता मार्क मिचेल ने कहा कि इस कानून से नौकरी देने वाली कंपनियां लोगों में भेदभाव करने लगेंगी। हो सकता है कि कई कंपनियां कानून लागू होने के बाद आवेदनकर्ता की स्थिति देखकर उसे नौकरी से निकाल दें।
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