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इसे कहते हैं असली ‘खिलाड़ी’, बाकी सब तो सिर्फ फील्डिंग कर रहे हैं; ट्रंप की नाक में दम करने वाले ईरानी विदेश की भारत में किसने की तारीफ


ईरान के साथ जंग के मैदान में पीछे हटने के लिए मजबूर अमेरिका को कूटनीतिक के मोर्चे पर भी नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। डिप्लोमेसी में शतरंज की बिसात पर डोनाल्ड ट्रंप को मात देने वाले ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अब्बास अराघची वैश्विक स्तर पर मजबूत शख्सियत बनकर उभरे हैं। तभी तो मुंबई में ईरानी मिशन ने अरागची की 20 साल की कूटनीति का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट साझा की है।
ईरानी मिशन ने X पर लिखा, “बातचीत की मेज पर 20 साल। म्यूनिख 2006 से तेहरान 2026 तक। डॉ. अब्बास अराघची बातचीत का चलता-फिरता विश्वकोश हैं। इसे कहते हैं असली ‘खिलाड़ी’, बाकी सब तो सिर्फ फील्डिंग कर रहे हैं!”
बातचीत का चलता-फिरता विश्वकोश – असल में, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर बहुत कम लोग ही अब्बास अराघची जैसी पारी खेल पाते हैं, या वे इतनी अहम भूमिकाएं निभा पाते हैं। इजरायल और अमेरिकी हमले के बाद के घटनाक्रमों के आईने में देखें तो यह अनुभवी राजनयिक बातचीत की मेज पर कमाल कर रहा है। अराघची डिप्लोमेसी के मोर्चे पर भी अमेरिका को पस्त करते नजर आ रहे हैं। 2006 में म्यूनिख के सर्द हॉल से लेकर 2026 में तेहरान के रणनीतिक चर्चा तक अराघची एक ऐसी शख्सियत के रूप में उभरे हैं, जिन्हें उनके सहयोगी और विरोधी दोनों ही बातचीत का चलता-फिरता विश्वकोश कहते हैं।
अराघची का असली कूटनीतिक दांव – अराघची का असली कूटनीतिक दांव तब देखने को मिला था जब 2006 में वह परमाणु विवाद के शुरुआती दिनों में ईरान के मूल रुख की नींव रख रहे थे।
2015 में वियना में हुए जॉइंट कम्प्रैहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) के दौर तक, वे कूटनीतिक के दिग्गज खिलाड़ी बन चुके थे।
अराघची आज 2026 में एक ऐसे सीनियर लीडर के तौर पर सामने आए हैं जिन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि बदलते वैश्विक हालात में ईरान की आवाज बुलंद रहे।
अब्बास अराघची ऐसे शख्स हैं, जिन्हें यह पता है कि पिछले मसौदों में कौन सी बातें या मुद्दे कहां दबे हुए हैं। आप अब्बास अराघची को झांसा नहीं दे सकते।
एक सीनियर डिप्लोमेट ने अराघची के बारे में कहा था
होर्मुज ब्लॉकेज के लिए अमेरिका-इजरायल जिम्मेदारः ईरान
इस बीच, पश्चिम एशिया संघर्ष से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित है। ईरान का कहना है कि तेहरान इस संकट से भारत और अन्य देशों को होने वाले नुकसान से ‘‘खुश नहीं’’ है, लेकिन इसके लिए अमेरिका व इजरायल जिम्मेदार हैं। ‘इंडिया टुडे’ को दिए एक इंटरव्यू में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका-इजरायल को उनके कृत्यों के लिए ‘‘जवाबदेह’’ ठहराना चाहिए, क्योंकि उन्होंने जो शुरू किया वह अभी भी जारी है।
जब उनसे पूछा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत जैसे देश के व्यापक रूप से प्रभावित होने के बीच क्या वह इस संघर्ष का कोई अंत देखते हैं तो बकाई ने कहा, ‘‘आपको देखना होगा कि 28 फरवरी को क्या हुआ था। उससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य हर देश के लिए खुला था।’’
होर्मुज क्यों बंद किया, ईरान ने बताई वजह – तेहरान में दिए गए इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘‘ईरान को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कुछ कदम उठाने पड़े और मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ईरान ने जो किया वह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जायज था। हमें अमेरिका और इजराइल जैसे आक्रमणकारियों का सामना करना पड़ा जो ईरान पर हमला करने के लिए अन्य खाड़ी देशों की जमीन का दुरुपयोग कर रहे थे। यह पूरी तरह गैरकानूनी था, यह आक्रमण का कृत्य था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमें जवाब देना पड़ा। इन हमलावरों को इस जलमार्ग का सैन्य हमले के लिए दुरुपयोग करने से रोकने के लिए हमें कदम उठाने पड़े। इसमें ईरान की कोई गलती नहीं है।’’
अमेरिका ने ईरान पर हमले को यह कहकर उचित ठहराया है कि तेहरान का परमाणु कार्यक्रम एक खतरा है।