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POK को खाली करने और आतंकवाद पर बात के लिए तैयार है भारत: जयशंकर

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नई दिल्ली: भारत ने पाकिस्तान से एक बार फिर कहा है कि वह उससे पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को जल्द से जल्द खाली किये जाने तथा सीमापार आतंकवाद को लेकर परिणाममूलक बातचीत करने के लिए तैयार है। पाकिस्तान के विदेश सचिव को 19 अगस्त को जम्मू कश्मीर पर बातचीत शुरू करने को लेकर भेजे गये पत्र के जवाब में विदेश सचिव एस जयशंकर ने 24 अगस्त को लिखे पत्र में भारत के इस सख्त रवैये को दोहराया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने आज यहां नियमित ब्रीफ्रिग में इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि विदेश सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि भारत सरकार जम्मू कश्मीर पर परिणाममूलक बातचीत करना चाहती है और पाकिस्तान को पता है कि भारत के मुताबिक इस मुद्दे का अपेक्षित परिणाम पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के उस हिस्से से अपना अवैध कब्जा हटाना है।

जयशंकर ने उसे यह भी याद दिलाया है कि बातचीत 1972 के शिमला समझौते, 1999 के लाहौर घोषणापत्र और 2004 के संयुक्त वक्तव्य के आधार पर होनी चाहिये। स्वरूप ने बताया कि विदेश सचिव ने यह भी कहा है कि जहां तक आतंकवाद का संबंध है, तो भारत ही नहीं बल्कि क्षेत्र का बड़ा हिस्सा यह मानता है कि पाकिस्तान ही आतंक का मुख्य स्रोत है। इसका ताकाा उदाहरण भारत में पकड़ा गया लश्करे तैयबा का आतंकवादी बहादुर अली है। इसीलिये भारत एवं पाकिस्तान के बीच एजेंडे में पाकिस्तान द्वारा सीमापार आतंकवाद और हिंसा भड़काये जाने पर रोक लगाना शीर्ष पर होगा। प्रवक्ता के अनुसार विदेश सचिव ने कहा कि वह इन मुद्दों पर परस्पर समय पर बातचीत के लिए तैयार हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद को न्यायोचित ठहराना और भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी परिणाम मूलक बातचीत का संजीदा आधार नहीं हो सकता है। जयशंकर ने उम्मीद जतायी कि पाकिस्तान सरकार अपने रुख पर पुनर्विचार करेगी और अच्छे पड़ोसी के तौर पर शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए गंभीरता का परिचय देगी। इससे पूरे क्षेत्र में एक व्यापक संदेश जाएगा जो पाकिस्तान की नीतियों से त्रस्त है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आतंकवाद और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने और आतंकवाद में अच्छे बुरे का भेद करने की नीति ने समूचे दक्षिण एशिया की शांति एवं स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। यह बहुत जरूरी है कि पाकिस्तान वास्तविकता को स्वीकार करे और द्विपक्षीय संबंधों पर सीमापार आतंकवाद के असर से इन्कार ना करे।

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