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राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने श्रीलंका-भारत के बीच भूमि संपर्क बढ़ाने पर दिया जोर, तमिल बहुल जाफना का किया दौरा


राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने तमिल बहुल जाफना का दौरा करके क्षेत्र के विकास पर व्यापक चर्चा की और रविवार को श्रीलंका एवं भारत के बीच भूमि संपर्क बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ पूर्वोत्तर मन्नार और दक्षिण भारत के बीच पुल बनाने के बारे में चर्चा की है। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि विक्रमसिंघे ने मन्नार और दक्षिण भारत के बीच भूमि संपर्क कायम करने की अपनी इच्छा जाहिर की तथा वह एक पुल बनाने के बारे में प्रधानमंत्री मोदी के साथ पहले ही चर्चा कर चुके हैं।
जाफना इसलिए महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने लगभग 30 वर्षों तक एक अलग तमिल मातृभूमि के लिए यहां सशस्त्र अभियान चलाया था। हालांकि 2009 में श्रीलंकाई सेना द्वारा लिट्टे के सर्वोच्च नेता वी. प्रभाकरण को मार गिराने के बाद संगठन का पतन हो गया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 2017 में बताया था कि 1980 के दशक के अंत से श्रीलंका में गायब हुए व्यक्तियों की संख्या 60,000 से 100,000 के बीच हो सकती है।
राष्ट्रपति ने अपनी चार-दिवसीय यात्रा के दौरान श्रीलंकाई संविधान में भारत-समर्थित 13वें संशोधन (13ए) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 13ए द्वारा बनाए गए प्रांतीय प्रशासनों का केंद्र के हस्तक्षेप के बिना आर्थिक विकास करने के लिए बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। भारत 13ए को लागू करने के लिए श्रीलंका पर दबाव डाल रहा है, जिसे 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद लाया गया था। 13ए में श्रीलंका में तमिल समुदाय को सत्ता के हस्तांतरण का प्रावधान है।