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प्रधानमंत्री मोदी ईरान यात्रा पर , सबकी निगाहें चाहबहार करार पर

narendra-modi-pti-L ऊर्जा संपन्न ईरान की अपनी पहली यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि उनकी इस खाड़ी देश की यात्रा का मकसद प्रतिबंध के बाद उसके साथ संपर्क, व्यापार, निवेश तथा ऊर्जा भागीदारी को मजबूत करना है. मोदी आज शाम यहां पहुंच रहे हैं. अपनी यात्रा के दौरान मोदी ईरान के शीर्ष नेता आयतुल्ला अली खामेनेइ तथा राष्ट्रपति हसन रुहानी के साथ द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा तथा रणनीतिक संबंधाें पर बातचीत करेंगे. मोदी की इस दो दिनी यात्रा में उनकी शीर्ष प्राथमिकता है ईरान के साथ चाहबहार बंदरगाह करार करना, जो 13 वर्षों से लटका हुआ है. अब जब पश्चिम ने ईरान पर से प्रतिबंध हटा लिये हैं, तब इस करार के होने से भारत की बड़ी ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी.

गुरुद्वारे में मत्था टेकने का कार्यक्रम
मोदी ने कई ट्वीट के जरिये कहा कि कनेक्टिविटी बढ़ाना, व्यापार, निवेश, ऊर्जा भागीदारी, संस्कृति तथा लोगाें का लोगाें के साथ संपर्क हमारी प्राथमिकता है. यहां पहुंचने के बाद मोदी एक स्थानीय गुरद्वारे में मत्था टेकने जाएंगे. मोदी ने कहा कि रुहानी तथा ईरान के शीर्ष नेता के साथ उनकी बैठकों से ‘‘हमारी रणनीतिक भागीदारी’ को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा. उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति रुहानी तथा ईरान के सम्मानित शीर्ष नेता के साथ हमें रणनीतिक भागीदारी को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा.’

मोदी ने कहा कि वह उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी इस यात्रा के दौरान चाहबहार पर करार पूरा हो जाएगा. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत और ईरान के बीच सभ्यताकालीन संबंध हैं और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता तथा समृद्धि के लिए दोनों के साझा हित हैं.’ चाहबहार दक्षिण-पूर्व ईरान का बंदरगाह है. इसके जरिये भारत को पाकिस्तान से अलग हटकर अफगानिस्तान में रास्ता बना सकेगा, जिसके साथ उसके नजदीकी सुरक्षा संबंध और आर्थिक हित हैं. गुरद्वारा जाने के अलावा मोदी भारत-ईरान संबंधों पर ‘पुनरावलोकन तथा संभावना’ सम्मेलन का भी उद्घाटन करेंगे. मोदी ने कहा, ‘‘मैं राष्ट्रपति रुहानी के आमंत्रण पर आज और कल अपनी ईरान यात्रा का इंतजार कर रहा हूं.’

Chabahar-Portचाहबहार बंदरगाह करार, तेल आयात दोगुना करना लक्ष्य
चाहबहार बंदरगाह के विकास के लिए करार पर दस्तखत के अलावा भारत का इरादा ईरान से तेल आयात दोगुना करने का भी है. कुछ साल पहले ईरान उसका दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था. इसके अलावा भारत वहां एक विशाल तेल क्षेत्र के विकास का अधिकार पाने की भी उम्मीद कर रहा है. प्रतिबंध हटने के बाद ईरान में राजनयिक और व्यावसायिक गतिविधियाें में काफी तेजी आयी है. चीन और रूस के नेता तेहरान जा चुके हैं.

मोदी से पहले सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ईरान यात्रा पर जा चुके हैं.

भारत के लिए अहम है चारबहार बंदरगाह, क्यों?

चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और यह भारत के लिए काफी रणनीतिक महत्व रखता है. यह फारस की खाड़ी के बाहर स्थित है और भारतीय पश्चिमी तट से इस पर आसानी से पहुंच बनायी जा सकती है. भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बंदरगाह के लिए यह पहला विदेशी उपक्रम होगा. भारत और ईरान में 2003 में ओमान की खाड़ी में पाकिस्तान के साथ ईरान की सीमा पर होर्मुज जलडमरुमध्य में चाहबहार बंदरगाह का विकास करने की सहमति बनी थी. ईरान पर पश्चिमी प्रतिबंधाें की वजह से यह परियोजना काफी धीमी गति से आगे बढी.
इस साल जनवरी में ईरान से प्रतिबंध हटाए गए और उसके बाद से भारत इस करार को पूरा करने के लिए काम कर रहा है. दुनिया भर में वैश्विक तेल खपत का 20 प्रतिशत इसी जलडमरुमध्य से होकर ही गुजरता है. पहले चरण में इस परियोजना में भारत का निवेश 20 करोड़ डाॅलर होगा. इसमें एग्जिम बैंक से 15 करोड़ डाॅलर की ऋण सुविधा शामिल है, जिसके लिए करार पर दस्तखत भी मोदी की यात्रा के दौरान किए जाएंगे. मोदी की यात्रा के दौरान भारत, अफगानिस्तान तथा ईरान के बीच परिवहन तथा पारगमन गलियारे के लिए त्रिपक्षीय करार पर भी दस्तखत होंगे. समझा जाता है कि मोदी और ईरान के राष्ट्रपति क्षेत्र की शांति और स्थिरता की स्थिति की भी समीक्षा करेंगे. क्षेत्र में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के अलावा साइबर अपराध तथा सामुद्रिक सुरक्षा जैसी चुनौतियां हैं.

ईरान यात्रा का मकसद व्यापार, ऊर्जा भागीदारी को प्रोत्साहन देना : मोदी
ऊर्जा संपन्न ईरान की अपनी पहली यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि उनकी इस खाड़ी देश की यात्रा का मकसद प्रतिबंध के बाद उसके साथ संपर्क, व्यापार, निवेश तथा ऊर्जा भागीदारी को मजबूत करना है. मोदी आज शाम यहां पहुंच रहे हैं. अपनी यात्रा के दौरान मोदी ईरान के शीर्ष नेता आयतुल्ला अली खामेनेइ तथा राष्ट्रपति हसन रुहानी के साथ द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा तथा रणनीतिक संबंधों पर बातचीत करेंगे. मोदी ने कई ट्वीट के जरिये कहा कि कनेक्टिविटी बढ़ाना, व्यापार, निवेश, ऊर्जा भागीदारी, संस्कृति तथा लोगों का लोगाें के साथ संपर्क हमारी प्राथमिकता है. यहां पहुंचने के बाद मोदी एक स्थानीय गुरद्वारे में मत्था टेकने जाएंगे. मोदी ने कहा कि रुहानी तथा ईरान के शीर्ष नेता के साथ उनकी बैठकों से ‘‘हमारी रणनीतिक भागीदारी’ को आगे बढाने का अवसर मिलेगा. उन्हाेंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति रुहानी तथा ईरान के सम्मानित शीर्ष नेता के साथ हमें रणनीतिक भागीदारी को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा.

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