
भारत ने चीन की चालाकी का तोड़ निकाल लिया है। उसने मध्य एशिया में घुसने की फिराक में बैठे चीन की चालाकी पर पानी फेर दिया है। भारत ने पहले तो अफगानिस्तान के साथ रिश्ते मजबूत किए और अब उसके बाद उज्बेकिस्तान के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है। यह वही उज्बेकिस्तान है, जहां से जहीरूद्दीन मुहम्मद बाबर भारत आया था और उसने 1526 में भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी थी। 3 अगस्त, 2026 यानी सोमवार को नई दिल्ली में हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान क्रिटिकल मिनरल्स, खनन, व्यापार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, रक्षा और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमत हुए। उज्बेकिस्तान के पाकिस्तान के साथ भी अच्छे संबंध हैं। मगर, सीमापार आतंकवाद को लेकर भारत-उज्बेकिस्तान दोनों का एक नजरिया है। ऐसे में पाकिस्तान का घिरना तय है।
सोशल मीडिया एक्स पर न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, दरअसल, उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं। इसी दौरान उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। विदेश मंत्री जयशंकर ने उज्बेकिस्तान को भारत के ‘विस्तारित पड़ोस’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय संबंध लगातार बढ़े हैं और अब इनमें निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
देश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देश अब खनन क्षेत्र, विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी संसाधनों (rare earth resources) के मामले में सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच करीब एक अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का जिक्र करते हुए। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में आर्थिक आदान-प्रदान में काफी वृद्धि होगी। दरअसल, रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स के सप्लाई-चेन पर चीन का कब्जा है। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी है कि और देशों से भी इन मिनरल्स की सप्लाई-चेन को बनाए रखने के लिए रिश्तों को मजबूत बनाए।
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