
इजरायल शायद कुछ देर के लिए संबंध सामान्य करने के मकसद से सऊदी अरब-अमेरिका परमाणु समझौते को स्वीकार कर लेता, लेकिन जो तस्वीर बनती दिख रही है उसमें तेल अवीव को अलग थलग पड़ने का डर सता रहा है। तेल अवीव को डर सता रहा है कि इजरायल को बिना कोई ‘सुरक्षा दिए’ सऊदी अरब को एडवांस परमाणु तकनीक मिल सकती है।
इजरायली एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोई भी परमाणु समझौता अकेला नहीं होता है और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने के लिए इजरायल को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट अवि कालो ने वाईनेट न्यूज में लिखा है कि बाइडेन प्रशासन इस रूख पर कामय था कि सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौता तभी किया जा सकता है जब वो इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने समते किसी बड़े समझौते का हिस्सा बने।
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते से इजरायल को क्या डर? – अवि कालो ने अपनी लेख में लिखा है कि यह अमेरिकी व्यवस्था में गहराई से जुड़ी एक ऐसी नीति थी जिसे राजनीतिक माहौल में होने वाले हर बदलाव के साथ बदलना नहीं था। लेकिन फिर डोनाल्ड ट्रंप आ गये। उन्होंने लिखा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति अब क्षेत्रीय व्यवस्था को नए सिरे से आकार देने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। इसके तहत वे सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को वह चीज दे रहे हैं जिसकी उन्हें लंबे समय से चाहत थी और वो है अमेरिका के साथ द्विपक्षीय असैन्य परमाणु समझौता।
उन्होंने लिखा है कि ऐसा लगता है कि जो समझौता किया जा रहा है उसमें उन मूलभूत शर्तों से बचा गया है जिन्हें अमेरिका में पहले आवश्यक माना गया था। इनमें सऊदी अरब का अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के उन्नत निगरानी ढांचे में शामिल होना जिसे अतिरिक्त प्रोटोकॉल के रूप में जाना जाता है और अपने क्षेत्र में यूरेनियम को समृद्ध नहीं करने की प्रतिबद्धता शामिल है। लेकिन इस समझौते में अमेरिका का नियंत्रण नहीं है।
सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड में शामिल करने की बात नहीं – इसके अलावा सऊदी अरब पर इजरायल को मान्यता देने और अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने का भी शर्त नहीं है। ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर अब्राहम अकॉर्ड का जिक्र किया है लेकिन समझौते में ‘गारंटी’ नहीं ली गई है। यानि अमेरिका सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की उस नीति को मान रहा है जिसमें परमाणु समझौता और इजरायल को मान्यता देने की बात को अलग अलग करके देखा गया है।
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