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राजपाल यादव के सामने SC ने रखी शर्त- जमा करें ₹5 करोड़, नहीं करना पड़ेगा सरेंडर, पत्नी राधा को भी निर्देश

राजपाल यादव के चेक बाउंस केस में नया अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी है, लेकिन एक शर्त भी लगा दिया है। कोर्ट ने कहा है कि एक्टर को बुधवार तक 5 करोड़ रुपये जमा करने होंगे, तभी उन्हें अंतरिम राहत मिलेगी।
जुलाई में चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए दो महीने का समय दिया गया था। अब इस मामले में ताजा जानकारी के अनुसार, 8 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी है, बशर्ते वे बुधवार तक कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करें।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश तब पारित किया जब राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव की ओर से दायर याचिकाओं का जिक्र उनके वकील सौरभ त्रिवेदी ने मौखिक रूप से किया। कोर्ट ने नोटिस जारी किया और मामले को 15 सितंबर, 2026 के लिए सूचीबद्ध किया।
बुधवार तक देने होंगे 5 करोड़ – बेंच ने आदेश दिया, ‘अगर याचिकाकर्ता कल तक इस कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा कर देते हैं, तो उन्हें सरेंडर करने से छूट दी जाती है।’ इन याचिकाओं में दिल्ली हाई कोर्ट के 10 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें चेक बाउंस के सात मामलों में राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखा गया था और हर मामले में उन्हें तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई गई थी।
कोर्ट ने दिया ₹1.05 करोड़ का भुगतान करना का आदेश – हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सात सजाएं एक साथ काटी जाएं। कोर्ट ने राजपाल यादव को हर मामले में संबंधित शिकायतकर्ता को ₹1.05 करोड़ का भुगतान करने का भी आदेश दिया था। इस रकम में से ₹1,04,75,000 शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दिए जाने थे, जबकि ₹25,000 राज्य को मिलने थे।
राधा यादव को 7 मामलों में निर्देश – राधा यादव को सात मामलों में से हर एक में शिकायतकर्ता को ₹5,51,380 का भुगतान करने का अलग से निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को पहले ही ₹2.25 करोड़ का भुगतान किया जा चुका था। बाकी बचे जुर्माने और मुआवजे की रकम तय करते समय इस राशि को ध्यान में रखा जाना था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 महीने का समय दिया – ये मामले M/s मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े विवादों और एक्टर की प्रोडक्शन कंपनी से जुड़े पेमेंट के लिए जारी किए गए चेक के बाउंस होने के आरोपों से जुड़े हैं। राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखते हुए, दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए दो महीने का समय दिया था और उस दौरान उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से उन्हें ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त पर सरेंडर करने से अंतरिम छूट मिल गई है।