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ईरान-पाकिस्तान संबंधों में तल्खी, ट्रकों की आवाजाही रोकने से भड़का तेहरान, बंद कर सकता है जमीनी सीमा


ईरान ने चेतावनी दी है कि वह पाकिस्तान के ट्रकों की आवाजाही रोके जाने के जवाब में अपनी जमीनी सीमा को बंद कर सकता है। यह चेतावनी ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य फदाहोसैन मलेकी ने दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से ट्रकों को ईरान में आने की अनुमति तो है, लेकिन दूसरी तरफ से (ईरान से पाकिस्तान की ओर) आवाजाही बंद है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका के दबाव में घुटने टेक दिए हैं। ईरान का यह बयान तब आया है, जब एक दिन पहले ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने तेहरान का दौरा किया था।
अमेरिका के दबाव में झुका पाकिस्तान – उन्होंने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के राजदूत से इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए प्रांतीय अधिकारियों के साथ संसद में आने को कहा है। मलेकी के अनुसार, पाकिस्तान ने इन प्रतिबंधों के पीछे एक “तकनीकी समस्या” का हवाला दिया है। उन्होंने इसके लिए अमेरिकी दबाव को जिम्मेदार ठहराया और कहा: “हमें अपने पाकिस्तानी दोस्तों से ऐसी उम्मीद नहीं थी, और न ही हमने सोचा था कि वे अमेरिकी दबाव में आ जाएंगे।”
अमेरिकी प्रतिबंधों का ईरान पर बुरा असर – ईरान के सुरक्षा प्रमुख मेजर जनरल मोहसेन रेजाई ने कहा है कि लंबे समय तक चलने वाले अमेरिकी प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन इससे होने वाली आर्थिक कठिनाइयों का मतलब ज़रूरी नहीं कि रणनीतिक पतन ही हो। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव रेजाई ने माना कि लंबे समय तक चलने वाली नाकेबंदी से देश की अर्थव्यवस्था और यहां की आबादी पर भारी दबाव पड़ेगा।
ईरानी नागरिकों को चुकानी होगी कीमत – रेजाई ने कहा, “लंबे समय तक चलने वाली नाकेबंदी से ईरान को नुकसान उठाना पड़ेगा। परिवारों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी, निवेश पर बुरा असर पड़ेगा, और अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों को बनाए रखना और भी मुश्किल हो जाएगा।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन आर्थिक पीड़ा और रणनीतिक पतन एक ही चीज नहीं हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि वाशिंगटन ने बार-बार यह मान लिया था कि आम ईरानियों के जीवन को और अधिक कठिन बनाने से तेहरान, अमेरिका की रणनीतिक मांगों को मानने के लिए मजबूर हो जाएगा।