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अमेरिका और ईरान के बीच समझौता लागू, ट्रंप और पेजेश्कियान ने किए डिजिटल हस्ताक्षर, खुल जाएगा होर्मुज स्ट्रेट


अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर हो गए हैं और यह लागू हो गया है। महीनों तक चले टकराव के बाद यह एक बड़ी कामयाबी है। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस दस्तावेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए हैं। इसके पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने इस पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए थे।
खुल जाएगा होर्मुज स्ट्रेट – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन में G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के लागू होने के साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा। 14 सूत्रीय समझौते में कहा गया है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे।
ईरान के लिए 300 अरब डॉलर – इसमें ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का भी प्रावधान है। हालांकि, इसमें अमेरिका को योगदान करने की जरूरत नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को प्रदर्शन आधारित बताया है, जिसमें ईरान को तभी लाभ मिलेगा जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते का मकसद चार महीने से चल रहे टकराव को खत्म करना और दुनिया के लिए ऊर्जा की सप्लाई के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।
शहबाज शरीफ ने कहा तुरंत होगा लागू – समझौते में मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान ने कहा है कि हस्ताक्षर के बाद यह तुरंत लागू होगा, लेकिन शुक्रवार को एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह जिनेवा में भी होगा। शहबाज शरीफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के नेताओं ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह समझौता तुरंत लागू होगा और पहले कदम के तौर पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देगा और अमेरिका तुरंत नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा।
हालांकि, बातचीत करने वाली टीमों के जेनेवा में इकठ्ठा होने का कार्यक्रम तय है, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने कहा कि शुक्रवरा की बैठक का मकसद समझौते पर हस्ताक्षर करना नहीं है और इसके होने या न होने पर अंतिम फैसला कुछ ही घंटों में आने की उम्मीद है। दस्तावेज को डिजिटल रूप से लागू करने का मतलब है कि स्विटजरलैंड में हस्ताक्षर का कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा।