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तेजस फाइटर जेट के तेजी से उत्पादन का रास्ता साफ…एचएएल नासिक यूनिट को उड़ान की मंजूरी…वायु सेना को मिलेगी नई स्वदेशी ताकत


हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की नासिक यूनिट को तेजस एमके1ए के लिए फ्लाइट क्लीयरेंस मिलने से स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों के निर्माण में तेजी आएगी। नासिक में तीसरी प्रोडक्शन लाइन शुरू होने से एचएएल की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान के तेजी से निर्माण के क्षेत्र में भारत में एक बड़ा रास्ता तय कर लिया गया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की नासिक यूनिट को सोमवार को तेजस एमके1ए (Tejas MK1A) के लिए फ्लाइट क्लीयरेंस मिल गई है। सोमवार को इस संबंध में जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार एचएएल की नासिक यूनिट में बनने वाले लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को उड़ान की मंजूरी प्राप्त हो गई है। इससे एचएएल को लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में एक नई ताकत मिली है और वह अब तेजी से दो जगहों से स्वदेशी हल्के फाइटर जेट का निर्माण कर सकता है। इससे भारतीय वायु सेना की जरूरतें जल्द पूरी होने की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।
नासिक से तेजस एमके1ए को फ्लाइट क्लीयरेंस
नासिक में बेंगलुरु के बाहर लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बनाने की एचएएल की तीसरी प्रोडक्शन लाइन है। यहां तेजी से लड़ाकू विमान निर्माण शुरू होने से देश को रक्षा क्षेत्र में अपनी तैयारी बढ़ाने और सामरिक तौर पर आत्मनिर्भर होने के लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी। बेंगलुरु की दोनों प्रोडक्शन लाइन की साल में 8-8 विमान बनाने की क्षमता है और नासिक की भी ही इतनी ही क्षमता होने की वजह से एचएएल को समय पर काम करने के लिए बहुत बड़ी सहायता मिलने वाली है और साल में 24 एलसीए निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। कुछ रिपोर्ट के अनुसार एचएएल नासिक में चौथा प्रोडक्शन लाइन भी तैयार कर सकता है। लेकिन, यह तभी फायदेमंद साबित हो सकता है, जब जीई से इंजन की सप्लाई दुरुस्त हो सके।