
ईरान ने कहा है कि अमेरिका अब दूसरे देशों को यह हुक्म नहीं दे सकता कि उन्हें क्या करना है। ईरान ने साफ किया कि समझौते के लिए अमेरिका को उसकी मांगों को मानना होगा। ईरान की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है, जब उसने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर नाराजी दिखाते हुए कहा है कि उसके लिए ईरान का परमाणु कार्यक्रम सबसे अहम मुद्दा है।
ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेजा तलाई-निक ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका अब स्वतंत्र राष्ट्रों पर अपनी नीतियां थोपने की स्थिति में नहीं है। वॉशिंगटन को यह स्वीकार करना होगा कि वह किसी पर कुछ भी नहीं थोप सकता है। उसे अपनी अवैध और अतार्किक मांगों को छोड़ना ही होगा।
अमेरिका ने लगातार दूसरे देशों में दखल दी है और उनकी संप्रभुता का ख्याल नहीं किया है। अब चीजें बदल रही हैं और अमेरिका अब स्वतंत्र राष्ट्रों पर अपनी नीतियां थोपने की स्थिति में नहीं है। अमेरिका को अतार्किक मांगों को छोड़ना ही पड़ेगा।
ईरान-अमेरिका में तनाव बरकरार – शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक से पहले बोलते हुए तलाई-निक ने कहा कि ईरान स्वतंत्र देशों विशेष रूप से SCO के सदस्य देशों के साथ अपनी रक्षात्मक सैन्य क्षमताओं को साझा करने के लिए भी तैयार है। अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से लड़ाई रुकी हुई है लेकिन दोनों पक्षों में तनाव लगातार बरकरार है।
Home / News / अमेरिका को छोड़नी पड़ेंगी ‘बेतुकी मांगें’, ईरान ने दिखाया सख्त रुख, समझौते पर फिर अटकेगी बात?
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