
अमेरिकी संस्था बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट ने अपने आकलन में पाया है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार भारत के हमलों से उसे बचाने में नाकाम हैं। रिपोर्ट कहती है कि मई 2025 में भारत के साथ 4 दिन के सैन्य टकराव के दौरान पाकिस्तान के अनुभव ने परमाणु हथियारों से मिलने वाली सुरक्षा (न्यूक्लियर डेटरेंस) की सीमाओं को उजागर कर दिया है। इसके चलते देश अब पारंपरिक सैन्य शक्ति पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
परमाणु हथियारों से लैस इन दोनों पड़ोसियों के बीच यह सैन्य टकराव 7 मई को शुरू हुआ, जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले की जवाबी कार्रवाई के तौर पर ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। रिपोर्ट से पता चला है कि इस टकराव के बाद पाकिस्तान के रणनीतिक नेतृत्व को एक इस सच्चाई का सामना करना पड़ा कि परमाणु हथियारों की भी अपनी सीमाएं होती हैं।
परमाणु बम नहीं रोक पाए लड़ाई – अमेरिकी संस्था की ये रिपोर्ट कहती है कि परमाणु हथियार संकट को पैदा होने से नहीं रोक पाए। परमाणु हथियार ना ही भारत को पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में हमले करने से रोक पाए और ना ही लड़ाई शुरू होने के बाद इस्लामाबाद को इससे निकलने का कोई निर्णायक रास्ता दे पाए। यह पाकिस्तान के परमाणु बम की सीमा को दिखाती है।
अमेरिका स्थित इस संस्था का आकलन ऐसे समय आया है, जब सुरक्षा गारंटी और बदलती वैश्विक रणनीतिक स्थितियों की चिंताओं के बीच कई देश परमाणु हथियारों में फिर से दिलचस्पी दिखा रहे हैं लेकिन परमाणु हथियार अब कम महत्वपूर्ण हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान से भी सुरक्षा नीति में परमाणु हथियारों की बदलती भूमिका के संकेत मिले हैं।
परमाणु हथियारों ने न तो संकट को शुरू होने से रोका और न ही संघर्ष बढ़ने पर नीति-निर्माताओं को कोई रास्ता सुझाया। इसके बजाय परमाणु हथियारों की मौजूदगी ने गलत आकलन और अनजाने में संघर्ष बढ़ने की संभावना के कारण पाकिस्तान के जवाबी विकल्पों को सीमित कर दिया।
पाकिस्तान की विफलता – रिपोर्ट में कहा गया है कि परमाणु हथियारों की तुलना में पारंपरिक सैन्य सफलता से सेना और उसके संस्थानों के राजनीतिक हितों को बेहतर ढंग से साधा जा सकता है। इसमें तर्क दिया गया कि परमाणु हथियारों ने पाकिस्तान की सेना को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुख्य संरक्षक के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद की है। यह जनता का समर्थन हासिल करने की क्षमता सीमित है।
रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 के संघर्ष ने परमाणु डेटरेंस के दावों और सैन्य संकट के दौरान परमाणु हथियार असल में क्या कर सकते हैं, इसके बीच के अंतर को उजागर किया। परमाणु डेटरेंस मई 2025 के संकट को रोक नहीं पाया। संघर्ष बढ़ने के डर ने भारत को पाकिस्तान के मुख्य इलाकों में गहराई तक हमला करने से नहीं रोका।
परमाणु हथियार चाहने वाले देशों के लिए चेतावनी – रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान के रणनीतिक प्रतिष्ठान के लिए परमाणु डेटरेंस की सीमाओं को छिपाना मुश्किल हो रहा है। भारत से टकराव के दौरान पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का जखीरा ना केवल समाधान देने में विफल रहा बल्कि इसने अतिरिक्त जोखिम भी पैदा किए। भारत के मिसाइल हमलों का जवाब देने में पाकिस्तान के सामने आई चुनौती आई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान का अनुभव परमाणु प्रतिरोध (न्यूक्लियर डेटरेंस) के सिद्धांत को गलत साबित नहीं करता लेकिन यह दिखाता है कि सुरक्षा चुनौतियों के लिए परमाणु हथियारों को एकमात्र समाधान मानना खतरनाक हो सकता है। इससे अगर कुछ पता चलता है तो यह कि परमाणु हथियारों की उपयोगिता उनके समर्थकों के दावों की तुलना में कहीं कम है।
रिपोर्ट के अनुसार, परमाणु हथियार हासिल करने पर विचार कर रहे देशों के लिए पाकिस्तान का अनुभव एक अलग सवाल खड़ा करता है। इन देशों को सिर्फ यह नहीं सोचना चाहिए कि परमाणु हथियार सुरक्षा के लिहाज से क्या दे सकते हैं। बल्कि उन्हें इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि परमाणु बम किन सैन्य सीमाओं और जोखिमों को जन्म देता है।
Home / News / अमेरिका से ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी पर मुहर, रिपोर्ट में खुलासा- खोखले साबित हुए पाकिस्तान के न्यूक्लियर डेटरेंस के दावे
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