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अब पाकिस्तान का क्या होगा…भारत की रक्षा ताकत दुश्मनों का काल बन रही..अमेरिका-यूरोप के लिए भी टेंशन


भारत की रक्षा शक्ति में वृद्धि हुई है, जिससे देश रक्षा उत्पादन में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होने लगा है। प्रधानमंत्री मोदी का ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ और स्वदेशी जेट इंजन के विकास पर जोर देना, रक्षा निर्यात में देश को ग्लोबल प्लेयर बना सकता है।
एक कहावत है कि कुछ भी होता है तो अच्छे के लिए ही होता है। भारत के लिए ऑपरेशन सिंदूर की वजह से जो हालात बने, उसने हमें अपनी ताकत और भविष्य की संभावित रक्षा क्षमता से भी रूबरू करवाने का मौका दिया है। 10 मई के बाद से एक के बाद रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत के बारे में जानकारियां सामने आ रही हैं। 79वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा सेक्टर में देश की मौजूदा स्थिति और भविष्य की उम्मीदों को भी साझा कर दिया है। कुल मिलाकर आज की तारीख में भारत के लिए डिफेंस सेक्टर में दो बहुत ही सकारात्मक पहलू हैं। पहला, हम तेजी से अत्याधुनिक युद्ध प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर होने की दिशा में बढ़ रहे हैं। दूसरा, भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से ग्लोबल प्लेयर बनकर उभर रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर ने रक्षा क्षेत्र में खोले द्वार – पिछले कुछ वर्षों में भारत को चीन और पाकिस्तान के साथ जो जियोपॉलिटिकल टेंशन झेलनी पड़ी है, उससे हमें रक्षा क्षेत्र में अपनी ताकत को बढ़ाने का बेहतर मौका मिला है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संघर्ष के हर मोर्चे पर भारतीय सशस्त्र सेना ने अपने अदम्य शौर्य का परिचय दिया, क्योंकि हमने जिन ड्रोन और मिसाइलों से दुश्मन को निशाना बनाया, वह भारत में ही विकसित हुई हैं। इसके उलट हमारी सशस्त्र सेना पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोनों को पूरी तरह से धूल चटाने में भी सफल हुए हैं। भारत की इसी बढ़ती ताकत को देखकर पीएम मोदी को यह हौसला मिला है कि उन्होंने लाल किले की प्राचीर से न सिर्फ महत्वपूर्ण मिलिट्री उपकरणों के निर्माण की घोषणा की है, बल्कि मित्र राष्ट्रों में उन्हें निर्यात करके डिफेंस एक्सपोर्ट के क्षेत्र में भी भारत को ग्लोबल पावर बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।