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जमीन के अंदर क्यों दबाए 2000 अंडरवियर? 2 महीने बाद निकाले गए बाहर, वैज्ञानिक देखकर हैरान

स्विटजरलैंड में वैज्ञानिकों ने मिट्टी की हालत का पता लगाने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया है। इसके लिए बागीचों और लॉन में अंडरवियर के 2000 जोड़े दबाए, जिन्हें दो महीने बाद बाहर निकाला गया। इसे प्रूफ बाय अंडरपैट्स प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। इसका मकसद मिट्टी की हालत के बारे में जानकारी हासिल करना था। वैज्ञानिकों ने जब 2 महीने बाद इन अंडरपैंट्स को बाहर निकालकर स्टडी की तो हैरान करने वाले नतीजे सामने आए। इस स्टडी को प्लांट्स, पीपल, प्लैनेट जर्नल में प्रकाशित किया गया था।
प्रूफ बाय अंडरपैंट्स प्रोजेक्ट –
स्टडी में शोधकर्ताओं ने लिखा कि मिट्टी की हालत के बारे में जानकारी देने के लिए प्रूफ बाय अंडरपैंट्स प्रोजेक्ट एक आसान तरीका है। यह स्टडी 5 साल पहले की गई थी, जिसमें 1000 वालंटियर ने स्विटजरलैंड में अलग-अलग जगहों पर अंडरवियर और 12000 टी-बैग दबाए थे। दो महीने बाद उन्हें निकालकर लैब भेजा गया। उनमें से कुछ में शायद ही कोई कपड़ा बचा था, जबकि कुछ में सिर्फ एक या दो छेद थे।
स्टडी में चला मिट्टी की हालत का पता – ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की अगुवाई में वैज्ञानिकों ने कहा कि बिना छेद वाले अंडरपैंट मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी का संकेत हैं। रिसर्चर्स ने लिखा, मिट्टी तेजी से खराब हो रही है, जिससे फूड प्रोडक्शन, बायोडायवर्सिटी और पृथ्वी के सिस्टम के कामकाज पर खतरा मंडरा रहा है।
स्टडी में लॉन, खेती वाली जमीन और घास के मैदानों में बायोलॉजिकल एक्टिविटी के सबसे कम संकेत देखे गए। घरों और इमारतों के आस-पास घास वाली जगहों पर मिट्टी सबसे कम उपजाऊ थी। वहीं, प्राइवेट बागीचों में सबसे ज्यादा एक्टिव डीग्रेडर्स- कीड़े, फंगस, बैक्टीरिया- पाए गए। इसके साथ ही वहां आर्गेनिक कार्बन और पोषक तत्वों का स्तर भी सबसे ज्यादा था।
प्राइवेट बागीचों में डीकंपोज हुआ कॉटन – प्राइवेट बागीचों में रखे अंडरवियर का लगभग 58% कॉटन दो महीनों में डीकंपोज हो गया। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि इन जगहों की अच्छी तरह से देखभाल की जाती है और फर्टिलाइजर्स से पोषण दिया जाता है, ऐसे में डीग्रेडर्स को यहां बढ़ने का मौका मिला। वहीं, लॉन में कॉटन डीकंपोज होने का आंकड़ा 40 प्रतिशत था, जो सभी जगहों में सबसे कम था।
स्टडी में ऊपरी मिट्टी के खराब होने को बड़ा खतरा गया है। इसमें कहा गया है कि ऊपरी मिट्टी हमारे भोजन का 95 प्रतिशत हिस्सा देती है। लेकिन जैसे-जैसे इसकी क्वालिटी खराब होती है, समाज के लिए खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने लिखा, समाज में इस खतरे को ज्यादातर लोग नहीं समझते, जिससे मिट्टी को बचाने के लिए कदम उठाने में रुकावट आती है।