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मक्का रक्षा समझौते में शामिल होगा ईरान? तेहरान ने दिया बड़ा संकेत, इजरायल-अमेरिका टेंशन में


ईरान ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक के बाद बड़ा ऐलान किया है। उसने संकेत दिया है कि ईरान पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह बड़ी भू राजनीतिक घटना होगी, जो मध्य पूर्व के सभी समीकरणों को ध्वस्त कर सकती है। इसका असर इजरायल और अमेरिका पर भी पड़ेगा। हो सकता है कि मध्य पूर्व से अमेरिका का पहले जैसा प्रभाव समाप्त हो जाए। ईरान शिया बहुल देश है, जिसके अमेरिका के साथ संबंध अच्छे नहीं हैं। वहीं, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान सुन्नी बहुल देश हैं, जिनके अमेरिका के साथ बहुत मजबूत संबंध हैं।
मक्का पैक्ट में शामिल होगा ईरान? – ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार, ईरानी सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेज़ाई के सहयोगी अली बघेरी कानी ने कहा है कि ईरान, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है। कानी ने बताया कि तेहरान में चारों देशों के अधिकारियों के बीच सोमवार को हुई बैठक से यह संदेश गया है कि “विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग पर भी चर्चा हुई।
ईरान के सिक्योरिटी चीफ ने खेला दांव – सरकारी मीडिया पर जारी एक बयान के अनुसार, तेहरान में सऊदी, तुर्की और पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बैठक के बाद, ईरान के सुरक्षा प्रमुख ने कहा कि क्षेत्रीय शक्तियां इस बात पर सहमत हैं कि सुरक्षा पश्चिमी एशिया के भीतर से ही आनी चाहिए। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा, “ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध और सशस्त्र बलों की ताकत के कारण, इस क्षेत्र में और तुर्की, पाकिस्तान तथा सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत में एक नया और सकारात्मक माहौल बना है।”
मध्य पूर्व से अमेरिका को बाहर करने की कूटनीति – उन्होंने आगे कहा, “ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध के परिणाम दिन-ब-दिन और अधिक स्पष्ट होते जा रहे हैं।” उन्होंने बताया कि चारों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना ​​है कि “क्षेत्र की समस्याओं का समाधान इन चारों देशों के मिलकर काम करने में ही निहित है।” उन्होंने कहा, “पश्चिमी एशिया में सुरक्षा यहीं के देशों द्वारा सुनिश्चित की जानी चाहिए और किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को रोका जाना चाहिए।”