
बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन पर जमकर हमला बोला है। जमात-ए-इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान ने पूछा कि कैसे राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने 5 अगस्त 2024 की घटनाओं को कैसे दबा दिया था। आपको बता दें कि इसी दिन शेख हसीना ने बांग्लादेश को छोड़ा था और हिंसक प्रदर्शन के बाद भारत आ गई थीं। इसके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ जिसने करीब 18 महीने तक देश की सत्ता को संभाला और अब इस महीने हुए चुनाव के बाद तारिक रहमान देश के नये प्रधानमंत्री बने हैं।
मोहम्मद यूनुस के सत्ता से बाहर जाने के बाद अब देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने बताया है कि उनके साथ कैसा बर्ताव किया गया था। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा था कि उन्हें एक तरह से राष्ट्रपति भवन में नजरबंद करके रखा गया था। उन्हें किसी भी विदेश दौरे पर जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। यहां तक कि उन्हें इलाज करने के लिए सिंगापुर जाने की भी इजाजत नहीं दी जाती थी। राष्ट्रपति ने इल्जाम लगाया कि मोहम्मद यूनुस अपने किसी भी फैसले या विदेश दौरे की कोई जानकारी राष्ट्रपति आवास को नहीं देते थे और एक तानाशाह की तरह शासन चला रहे थे।
बांग्लादेश में नया राजनीतिक बवाल – राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के इसी बयान के बाद जमात-ए-इस्लामी ने उनपर पलटवार किया है। जमात के प्रमुख शफीकुर रहमान ने मंगलवार को फेसबुक पर लिखा कि “राष्ट्रपति ने 5 अगस्त 2024 के बारे में कई बातें दबा दी हैं। उन्होंने अपने मौजूदा बयान में यह नहीं माना कि उन्होंने वहां मौजूद नेताओं से गिरे हुए और भगोड़े प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बारे में क्या कहा और बाद में देश को क्या बताया। और उन्होंने उस दिन ऐसा कुछ नहीं कहा जो वह अब कह रहे हैं।” शफीकुर शेख हसीना के गुम हुए इस्तीफे के लेटर पर हुए विवाद का जिक्र कर रहे थे। यह एक ऐसा डॉक्यूमेंट था जो हसीना के भारत जाने के बाद यूनुस के अंतरिम शासन को कानूनी मान्यता देने के लिए कानूनी तौर पर जरूरी था।
शहाबुद्दीन ने 5 अगस्त को हसीना के जाने के कुछ घंटों बाद देश के नाम एक टेलीविजन संबोधन में कहा था कि “आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को दे दिया है और मुझे वह मिल गया है।” हालांकि दो महीने बाद उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस्तीफे के बारे में सिर्फ सुना था लेकिन शेख हसीना ने इस्तीफा दिया है, इसके बारे में कोई सबूत नहीं है। वहीं अक्टूबर 2024 में शहाबुद्दीन ने ढाका के अखबार जनतार चोख को बताया था कि “मैंने कई बार (इस्तीफा लेने की) कोशिश की लेकिन नाकाम रहा। शायद उनके पास समय नहीं था।”
Home / News / बांग्लादेश के राष्ट्रपति पर बरसा जमात-ए-इस्लामी, मोहम्मद यूनुस की खोली थी पोल, शेख हसीना के इस्तीफे पर बवाल
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