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प्रलय , Akash-NG, अजरबैजान-तुर्की की जुगलबंदी पर प्रहार, आर्मेनिया को मिलेंगे घातक हथियार!


भारत के खिलाफ संघर्ष के दौरान अजरबैजान और तुर्की ने पाकिस्तान की मदद की थी। अब भारत उसका चुन चुनकर बदला ले रहा है। दक्षिण कॉकस क्षेत्र में तेजी से बदलते सामरिक समीकरणों के बीच आर्मेनिया अब भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है। पिछले कुछ वर्षों में आर्मेनिया ने तेजी से भारतीय हथियार खरीदे हैं। अजरबैजान के खिलाफ युद्ध में रूसी हथियारों के नाकाम रहने के बाद आर्मेनिया अब भारतीय हथियारों पर भरोसा कर रहा है। अजरबैजान के खिलाफ आकाश डिफेंस सिस्टम में पिनाका रॉकेट ने असर दिखाया था। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्मेनिया अगले फेज में भारक से Akash-NG एयर डिफेंस सिस्टम, प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल और अपने Su-30SM लड़ाकू विमानों के बड़े को अपग्रेड करने के लिए एडवांस स्तर पर बातचीत कर रहा है।
भारतीय मिसाइलें कितनी घातक होती हैं पाकिस्तान अंजाम देख चुका है। अब अजरबैजान और तुर्की जैसे देशों की बारी है। खासकर भारत के लिए ये सिर्फ हथियार सौदा नहीं होने वाला है बल्कि बल्कि कॉकस क्षेत्र में एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है। लंबे समय तक रूस पर निर्भर रहने वाला आर्मेनिया अब भारत को एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में देख रहा है।
आर्मेनिया भारतीय Akash-1S एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने वाला पहला ग्राहक बना था। लगभग 720 मिलियन डॉलर की इस डील के तहत 15 एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी भारत पहले ही कर चुका है। इस सिस्टम ने आर्मेनिया की लो और मीडियम एल्टीट्यूड एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत किया है जिससे ड्रोन, क्रूज मिसाइल और लड़ाकू विमानों के खिलाफ सुरक्षा मिलती है। लेकिन अब क्षेत्रीय खतरे तेजी से बदल रहे हैं। आईडीआरडब्यू ने बताया है कि अजरबैजान ने पाकिस्तान से JF-17 Block III लड़ाकू विमान खरीदे हैं जो आर्मेनिया के मौजूदा डिफेंस सिस्टम को भेद सकता है। इसीलिए आर्मेनिया अब एडवांस Akash-NG एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने की तैयारी में है, जिसे पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों को मार गिराने के लिए ही डिजाइन किया गया है।
DRDO ने आकाश-NG एयर डिफेंस सिस्टम में एडवांस AESA रडार सीकर, ड्यूल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर और तेज प्रतिक्रिया क्षमताओं से लैस किया है। यह करीब 30 किलोमीटर तक की रेंज में तेज रफ्तार वाले और अत्यधिक फुर्तीले लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की परिस्थितियों में इसे काफी प्रभावी माना जा रहा है।
प्रलय मिसाइल से बढ़ेगी आर्मेनिया की हमलावर क्षमता – आईडीआरडब्यू की रिपोर्ट के मुताबिक आर्मेनिया भारत की प्रलय टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल में दिलचस्पी दिखा रहा है। ये एक तबाही मचाने वाली मिसाइल है और अजरबैजान और तुर्की के पास ऐसे एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है जो प्रलय को तबाही मचाने से रोक सके। प्रलय एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है जिसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर तक बताई जाती है। यह पूरी तरह कैनिस्टराइज्ड सिस्टम है और सॉलिड प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर से लैस है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उड़ान के दौरान लगातार अपना रास्ता बदलती रहती है जिससे दुश्मन के इंटरसेप्टर सिस्टम के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यदि यह डील आगे बढ़ती है तो आर्मेनिया को अजरबैजान के इजरायली LORA मिसाइल सिस्टम के मुकाबले एक मजबूत रणनीतिक जवाब मिल जाएगा। इससे कॉकस क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।
भारत करेगा Su-30SM फाइटर जेट्स का बड़ा अपग्रेड – आर्मेनिया के पास फिलहाल रूस से खरीदे गए चार Su-30SM लड़ाकू विमान हैं। यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस उसके लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल क्षमता बनाने में नाकाम हो रहा है। ऐसे में आर्मेनिया के लिए अपने विमानों के स्पेयर पार्ट्स, तकनीकी सपोर्ट और आधुनिक हथियारों की कमी बड़ी से निपटना मुश्किल हो गया है। ऐसे में आर्मेनिया ने भारत की ओर रुख किया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े Su-30MKI ऑपरेटर देशों में शामिल है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इनके रखरखाव और अपग्रेड के लिए मजबूत घरेलू इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित अपग्रेड पैकेज में भारतीय एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और आधुनिक सेंसर शामिल हो सकते हैं। सबसे अहम बात यह है कि आर्मेनिया अपने Su-30SM विमानों को भारत की Astra Mk1 BVR मिसाइल से लैस करना चाहता है। Astra Mk1 की रेंज करीब 110 से 160 किलोमीटर तक मानी जाती है। इससे आर्मेनियाई पायलट दुश्मन के लड़ाकू विमानों को काफी दूर से निशाना बना सकेंगे। यह पुराने सोवियत दौर की मिसाइलों की तुलना में काफी ज्यादा आधुनिक और घातक मानी जाती है।
भारत-आर्मेनिया साझेदारी क्यों है खास? – भारत और आर्मेनिया के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग सिर्फ व्यापारिक सौदा नहीं है। इसके पीछे बड़ा सामरिक संदेश भी छिपा है। तुर्की, पाकिस्तान और अजरबैजान का बढ़ता गठजोड़ लंबे समय से भारत के लिए चिंता का विषय रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ये तीनों देश भारत विरोधी रुख अपनाते रहे हैं। ऐसे में भारत अब आर्मेनिया को अत्याधुनिक हथियार और सैन्य तकनीक उपलब्ध करा रहा है और इस कदम को एक रणनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है। इससे भारत की रक्षा निर्यात नीति को भी मजबूती मिल रही है और दुनिया में “मेक इन इंडिया” रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ रही है।