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समुद्र के नीचे महायुद्ध की तैयारी, अमेरिका ने की 76 अरब डॉलर की ऐतिहासिक परमाणु सबमरीन डील, चीन से डरे?


चीन की बढ़ती नौसैनिक शक्ति से डरे अमेरिका ने 14 नई पनडुब्बियां बनाने के लिए 76.6 अरब डॉलर का ऐतिहासिक समझौता किया है। इस डील में कोलंबिया-क्लास की पांच परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा। इसका कॉन्ट्रैक्ट जनरल डायनामिक्स इलेक्ट्रिक बोट (GDEB) को दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन कॉन्ट्रैक्ट्स में 2025-2029 के वित्तीय वर्षों के दौरान वर्जीनिया-क्लास की नौ परमाणु-संचालित अटैक पनडुब्बियां (SSNs) बनाने का काम भी शामिल है।
नौ जहाजों का यह कॉन्ट्रैक्ट GDEB और HII-न्यूपोर्ट न्यूज शिपबिल्डिंग (HII-NNS) को दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन अपनी नौसेना की शक्ति में जिस तरह से इजाफा कर रहा है उसने अमेरिकी प्रशासन को परेशान कर दिया है। इसके बाद समुद्री वर्चस्व बनाए रखने के लिए नई पनडुब्बियों के निर्माण का फैसला लिया गया है।
अमेरिका ने 76.6 अरब डॉलर की पनडुब्बी डील की – अमेरिकी नौसेना ने बताया है कि यह पनडुब्बियां अमेरिकी नौसेना की समुद्री क्षमता और देश की न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता को बढ़ावा देंगी। पनडुब्बी कार्यक्रम के निदेशक वाइस एडमिरल रॉबर्ट गौचर ने कहा ‘यह ऐतिहासिक निवेश समुद्र के नीचे की श्रेष्ठता और हमारे परमाणु त्रय के पुनर्पूंजीकरण के लिए विभाग की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है।’ कोलंबिया क्लास की ये पनडुब्बियां नौसेना के पुराने परमाणु निवारक बेड़े की जगह लेंगी जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका के समुद्र-आधारित रणनीतिक परमाणु निवारक क्षमता बनी रहेगी।
अमेरिकी नौसेना की सबमरीन डील क्या है? – इस अनुबंध के तहत कुल 14 नई परमाणु पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा। इनमें 5 कोलंबिया-क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और 9 वर्जीनिया-श्रेणी अटैक पनडुब्बियां शामिल हैं। जुलाई 2038 तक सभी पनडुब्बियों को यूएस नेवी में शामिल कर लिया जाएगा। यूएस नेवी ने कहा कि ‘वर्जीनिया क्लास’ पनडुब्बी एक प्रमुख टैक्टिकल स्ट्राइक और मल्टी-मिशन प्लेटफॉर्म है जो समुद्र के नीचे दुनिया भर में लगातार दबदबा बनाए रखती है।
चीन से डरकर नई पनडुब्बियां का निर्माण कर रहा अमेरिका – आपको बता दें कि हाल के वर्षों में चीन ने अपनी शिपबिल्डिंग और नौसैनिक विस्तार खासकर परमाणु पनडुब्बियों के बेड़े की रफ्तार को बहुत तेज कर दिया है। अमेरिका अपनी पारंपरिक बढ़त को बनाए रखने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की चुनौती का मुकाबला करने के लिए अपनी औद्योगिक और रक्षा क्षमता को रिकॉर्ड स्तर पर अपग्रेड कर रहा है।
डिफेंस थिंक-टैंक IISS की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी नौसेना के पास कुल 65 से ज्यादा सक्रिय परमाणु पनडुब्बियां हैं जबकि चीन के पास सिर्फ 12 सक्रिय परमाणु पनडुब्बियां हैं। लेकिन चीन के पास इसके अलावा करीब 46 पारंपरिक (डीजल-इलेक्ट्रिक) पनडुब्बियां भी मौजूद हैं जो तटीय रक्षा में मजबूत हैं।
अमेरिकी परमाणु पनडुब्बियां जैसे वर्जीनिया और सीवॉल्फ क्लास दुनिया में सबसे छिपकर रहने वाली पनडुब्बी मानी जाती हैं। समंदर की गहराई में इन्हें ट्रैक करना लगभग असंभव है। इसके विपरीत चीनी परमाणु पनडुब्बियों खासकर पुराने मॉडल के इंजन काफी आवाज करते हैं जिससे वे अमेरिकी सोनार की पकड़ में आसानी से आ सकती हैं।