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ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट में बासमती पर जंग हारा भारत, पाकिस्तान की बल्ले-बल्ले, किन-किन देशों में दिखेगा असर?


ऑस्ट्रेलिया की फेडरल कोर्ट ने भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने ऑस्ट्रेलिया में बासमती चावल के लिए एक खास सर्टिफिकेशन ट्रेडमार्क की भारत की अपील को खारिज कर दिया है। इस फैसले से सबसे ज्यादा असर हरियाणा और पंजाब पर पड़ा है। इनमें से सिर्फ पंजाब देश के बासमती एक्सपोर्ट का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों राज्यों के बासमती एक्सपोर्टर्स होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपमेंट को लेकर अनिश्चितता के बीच दूसरे विदेशी बाजारों में अपना कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।
बासमती एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के वाइस-प्रेसिडेंट रंजीत सिंह जोसन ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा है कि हालिया फैसले का मतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई बाजार में भारतीय एक्सपोर्टर्स की कोई खास स्थिति नहीं होगी और अब उन्हें पड़ोसी देश पाकिस्तान के एक्सपोर्टर्स से मुकाबला करना होगा। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि बासमती चावल सिर्फ भारत की विशेष संपत्ति नहीं है बल्कि यह भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों में उगाई जाने वाली एक पारंपरिक फसल है।
ऑस्ट्रेलिया कोर्ट के बासमती चावल दिए फैसले का क्या मतलब है? – भारत के कुल बासमती निर्यात में अकेले पंजाब की हिस्सेदारी लगभग 40% है। इस फैसले से पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में वर्तमान में भारतीय बासमती का बड़ा दबदबा है। ये कारोबार करीब करीब 380 मिलियन डॉलर है। जबकि पाकिस्तान का निर्यात सिर्फ 44.12 मिलियन डॉलर के करीब है। अब पाकिस्तानी निर्यातक कम कीमतों के दम पर भारतीय बाजार हिस्सेदारी को कड़ी चुनौती दे सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया एक ‘बेंचमार्क’ कानूनी व्यवस्था माना जाता है। इस फैसले का हवाला देकर पाकिस्तान अब यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड और केन्या जैसे अन्य महत्वपूर्ण बाजारों में भी भारत के खिलाफ अपने दावों को और मजबूती से पेश कर सकता है।
पाकिस्तान से मिलने वाली कड़ी टक्कर की वजह से भारतीय निर्यातकों को ऑस्ट्रेलिया में अपनी कीमतें घटाने पर मजबूर होना पड़ सकता है जिससे उनका शुद्ध मुनाफा घटेगा।
आपको बता दें कि ‘बासमती’ शब्द सर्टिफाइड APEDA चावल और अन्य बासमती चावल के बीच कोई अंतर नहीं करता है। कोर्ट ने ऑस्ट्रेलिया के ट्रेड मार्क्स एक्ट 1995, खासकर सेक्शन 177(2) के प्रावधानों पर भरोसा किया। यह सेक्शन उन फैक्टर्स को बताता है जिनसे यह तय किया जाता है कि क्या कोई सर्टिफिकेशन मार्क सर्टिफाइड सामान को नॉन-सर्टिफाइड सामान से अलग करने में सक्षम है या नहीं।
APEDA ने 2019 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया में ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया था। इसमें बताया गया था कि 1988 और 2018 के बीच ऑस्ट्रेलियाई बाजार में भारतीय बासमती की अच्छी-खासी मौजूदगी रही है। ऑस्ट्रेलियाई रिटेल आउटलेट्स के जरिए बेचे गए भारतीय बासमती की मात्रा का अनुमान 306,095 टन लगाया गया था जिसकी कीमत 380 मिलियन डॉलर थी जबकि पाकिस्तानी बासमती की बिक्री सिर्फ 44.12 मिलियन डॉलर थी।