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म्यांमार से आने वाले शरणार्थियों का बढ़ सकता है बोझ, पड़ोसी देश के हालात पर मिजोरम सीएम ने जताई चिंता


मिजोरम सरकार ने संकेत दिया है कि पड़ोसी देश म्यांमार में जारी राजनीतिक और सुरक्षा संकट के कारण राज्य में शरणार्थियों की एक नई लहर आ सकती है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा है कि म्यांमार की बिगड़ती परिस्थितियों के चलते बड़ी संख्या में लोग सुरक्षा की तलाश में सीमा पार कर मिजोरम पहुंच रहे हैं। इससे राज्य के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। शिलांग में आयोजित नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) के 73वें पूर्ण सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि म्यांमार की भू-राजनीतिक स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।
आने वाले समय में और बढ़ सकता है भार – उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में और अधिक विस्थापित लोग मिजोरम का रुख कर सकते हैं। राज्य सरकार मानवीय आधार पर शरण दे रही है, लेकिन इससे प्रशासनिक और आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। फरवरी 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद से हजारों नागरिकों ने मिजोरम में शरण ली है। राज्य सरकार के अनुसार, फरवरी 2026 तक लगभग 30,900 म्यांमार नागरिकों में से करीब 90 प्रतिशत का बायोमेट्रिक पंजीकरण पूरा किया जा चुका है।
कितने शरणार्थी आ चुके हैं मिजोरम – 30,900 से अधिक म्यांमार नागरिक मिज़ोरम में शरण ले चुके हैं।
लगभग 90% म्यांमार शरणार्थियों का बायोमेट्रिक पंजीकरण पूरा।
2,375 बांग्लादेशी शरणार्थी राज्य में मौजूद।
बांग्लादेशी शरणार्थियों में 15% का पंजीकरण पूरा।
2023 की मणिपुर हिंसा के बाद आए करीब 10,000 विस्थापित लोग अब भी मिजोरम में रह रहे हैं।
बांग्लादेशी शरणार्थियों को भी दे रहा शरण – मिजोरम केवल म्यांमार से आए लोगों को ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश से आए शरणार्थियों को भी आश्रय दे रहा है। राज्य में मौजूद करीब 2,375 बांग्लादेशी शरणार्थियों में से लगभग 15 प्रतिशत का बायोमेट्रिक पंजीकरण किया जा चुका है। यह प्रक्रिया लोंगत्लाई, लुंगलेई और सेरछिप जिलों में जारी है। राज्य सरकार का कहना है कि मानवीय जिम्मेदारियों के साथ-साथ सीमित संसाधनों के बीच इन शरणार्थियों की देखभाल करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।