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चीन पाकिस्तानी नेवी को सौंपेगा AIP से लैस हैंगोर क्लास पनडुब्बी, भारत के लिए बड़ा खतरा


चीन आज पाकिस्तान की नौसेना को हैंगोर क्लास पनडुब्बी सौंपने जा रहा है। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी चीन के सान्या शहर में मौजूद हैं। उनके दफ्तर ने बताया है कि आसिफ अली जरदारी पांच दिनों के दौरे पर चीन गये हैं और इस दौरान कई डॉलर के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर चीनी नेतृत्व से बात होगी और राष्ट्रपति पाकिस्तान नेवी में एक सबमरीन को शामिल किए जाने के कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं। चीन, पाकिस्तान का एक अहम सहयोगी और निवेशक है और उसने अभी तक 65 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश ‘चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर’ यानि CPEC में किया है।
पाकिस्तान सरकार ने चीन के साथ आठ हैंगोर-क्लास पनडुब्बियां खरीदने के लिए एक समझौता किया था जिसके तहत चार पनडुब्बियां चीन में बनाई जा रही हैं जबकि बाकी चार पाकिस्तान में कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स लिमिटेड द्वारा बनाई जाएंगी। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक इस्लामाबाद लंबे समय से बीजिंग का सबसे बड़ा हथियार खरीदार रहा है और 2020-2024 की अवधि में उसने चीन के कुल हथियार निर्यात का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खरीदा है।
पाकिस्तान नौसेना को आज मिलेगा चीन से एक और पनडुब्बी – हैंगोर-क्लास आठ डीजल-इलेक्ट्रिक हमलावर पनडुब्बियों का एक नया बेड़ा है जो फिलहाल पाकिस्तान नौसेना के लिए चीन के साथ हुई 5 अरब डॉलर की एक ऐतिहासिक रक्षा डील के तहत बनाया जा रहा है। ये सभी पनडपब्बियां चीन की Type 039A/B (Yuan-class) की एक्सपोर्ट वैरायटी हैं और इन्हें पाकिस्तान की पानी के नीचे की क्षमताओं को काफी हद तक आधुनिक बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इन सभी 8 नई पनडुब्बियों के आने से पाकिस्तान की अंडरवाटर फ्लीट की संख्या बढ़कर 11 हो सकती है।
चीन के वुचांग शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री ग्रुप में बनाई जा रही चारों पनडुब्बियों को दिसंबर 2025 तक बना लिया था और अब उन्हें पाकिस्तान की नौसेना को सौंपा जा रहा है।
बाकी चार पनडुब्बियों का निर्माण घरेलू स्तर पर कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स में ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ समझौते के तहत किया जा रहा है।
चीन ने पाकिस्तान से वादा किया है कि 2028 तक सभी चारों पनडुब्बियां पाकिस्तान की नौसेना में शामिल हो जाएंगी। जबकि पाकिस्तान में बनने वाली पनडुब्बियों का निर्माण 2032 तक हो जाएंगी।
हैंगोर क्लास पनडुब्बियों की क्षमता खतरनाक क्यों होती है? – AIP टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल- चीन ने पाकिस्तान के लिए इन पनडुब्बियों को AIP यानि एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्सन टेक्नोलॉजी के साथ बनाया है। यह तकनीक पनडुब्बियों को हफ्तों तक पानी के नीचे रहने में सक्षम बनाती है। इससे पनडुब्बियों के लिए छिपकर हमला करना या लंबी लड़ाई के दौरान दुश्मन के क्षेत्र में कई दिनों तक छिपकर रहना आसान हो जाता है।
क्रूज मिसाइलों से लैस- जानकारी के मुताबिक ये पनडुब्बियां छह 533mm टॉरपीडो ट्यूबों से लैस हैं जो भारी टॉरपीडो और पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली क्रूज मिसाइलों (SLCMs) यानि बाबर-3—को दागने में सक्षम हैं। इससे पाकिस्तान की नौसेना को समुद्र-आधारित परमाणु ‘सेकंड-स्ट्राइक’ की संभावित क्षमता प्रदान करता है। हालांकि अभी इसकी सौ फीसदी पुष्टि नहीं पो पाई है।
स्टील्थ डिजाइन- स्पुतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक ये पनडुब्बियां स्टील्थ डिजाइन पर आधारित हैं जिससे इन्हें ट्रैक करना मुश्किल होगा और ये न्यूक्लियर बाबर-3 मिसाइल लॉन्च करने में सक्षम है। अगर ये सच है तो पाकिस्तान अब पनडुब्बी से भी परमाणु मिसाइल लॉन्च कर सकेगा।
पाकिस्तान नौसेना के रिटायर्ड रियर एडमिरल फैसल शाह ने स्पुतनिक को बताया “पाकिस्तान में इन पनडुब्बियों के निर्माण का महत्व बहुत ज्यादा है क्योंकि यह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ हो रहा है। पाकिस्तान का 90% व्यापार और 80% से ज्यादा ऊर्जा संसाधन समुद्र के रास्ते आते हैं। ऐसे में देश को आधुनिक टेक्नोलॉजी, रणनीतिक गहराई और घरेलू उत्पादन की जरूरत है।”
भारत के लिए रणनीतिक चुनौतियां क्या हैं? – AIP कई आधुनिक पनडुब्बियों में इस्तेमाल होने वाली एक जानी-मानी टेक्नोलॉजी है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पनडुब्बी को कम रफ्तार पर ज्यादा समय तक पानी के अंदर रहने में मदद करता है। वो भी बिना डीजल इंजन चलाने या बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आने की जरूरत के। जिससे इसकी छिपने की क्षमता यानी स्टील्थ और पानी के अंदर टिके रहने की क्षमता बढ़ जाती है खासकर उन समुद्री इलाकों में जहां अक्सर टकराव होता रहता है।