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अमेरिका के साथ डील पर ईरान में दोफाड़, अराघची पर भड़के कट्टरपंथी, क्या ट्रंप के सामने तेहरान ने किया सरेंडर?


अमेरिका के साथ डील के मुद्दे पर ईरान के अंदर दो फाड़ की स्थिति बनती जा रही है जो अब बाहर से दिखाई देने लगी है। डील को लेकर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची देश के शासन में शामिल कट्टरपंथियों को निशाने पर आ गए हैं। अराघची ने शुक्रवार को सरकारी टीवी पर बताया था कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। कट्टरपंथियों ने अराघची की इस घोषणा करने के तरीके को लेकर आलोचना की है।
अराघची ने डील को लेकर दिया बयान – अराघची ने शुक्रवार को कहा कि बातचीत का आखिरी चरण पूरा होने के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। सरकारी टीवी पर उन्होंने कहा, शायद आने वाले दिनों में हमारे और अमेरिका के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यह हस्ताक्षर डिजिटल और दूर से किए जाएंगे। इसका मतलब है कि हस्ताक्षर समारोह किसी बड़े नेता की आमने-सामने मौजूदगी के बगैर हो सकता है।
अराघची ने यह भी कहा कि समझौता ज्ञापन पर अभी हस्ताक्षर नहीं हुए हैं और इसमें बदलाव हो सकता है। उन्होंने समझौते को अंतिम समाधान नहीं, बल्कि एक अंतरिम राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था के रूप में पेश किया, जिसे परमाणु मुद्दे पर बातचीत से पहले लागू करना होगा। उन्होंने कहा कि परमाणु बातचीत बाद के चरण में शामिल होगी।
मीडिया को अटकलें न लगाने की सलाह – इसके पहले अराघची ने एक्स पर लिखा कि इस्लामाबाद समझौता कभी भी अंतिम रूप देने के इतना करीब नहीं पहुंचा था। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया से अपील की थी कि वे प्रक्रिया पूरी होने से पहले इसकी सामग्री के बारे में अटकलें न लगाएं। अराघची की इस पोस्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रीपोस्ट किया और इसे बहुत सकारात्मक कदम बताया। इसे लेकर अराघची कट्टरपंथियों के निशान पर आ गए हैं।
अराघची पर फूटा कट्टरपंथियों का गुस्सा – ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (ITGC) से जुड़ी फार्स न्यूज एजेंसी ने अराघची की आलोचना की। फार्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अराघची की पोस्ट ट्रंप के उस दावे का सीधे तौर पर खंडन करने में नाकाम रही कि समझौते के बारे में लीक हुई ईरानी खबरें गलत थीं। एजेंसी ने कहा कि मीडिया से संयम बरतने की अराघची का मतलब यह निकाला जा सकता है कि ईरान से प्रकाशित कुछ खबरें गलत थीं।
इसके पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने डील की संभावित शर्तों के बारे में ईरानी मीडिया की खबरों को खारिज कर दिया था। ट्रंप ने कहा था कि ईरान में प्रकाशित लीक हुई जानकारियों का सच्चाई से कोई संबंध नहीं था। बाद में उन्होंने एक्सियोस को बताया कि ईरान ने गलत जानकारी देने के लिए निजी तौर पर माफी मांगी थी।
ईरान के कट्टरपंथी क्या कह रहे? – ईरान के कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने भी ड्राफ्ट की आलोचना की है। नबावियन ने कहा, “समझौते का टेक्स्ट देखने के बाद मुझे कहना होगा कि पिछले दो संस्करणों की तुलना में यह अधिक नुकसानदेह है और ईरान ने इसमें ज्यादा पीछे कदम हटाए हैं।” वहीं, शुक्रवार की नमाज के बाद कई नेताओं ने समझौते को लेकर चेतावनी दी है और कहा कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की मंजूरी के बिना कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।