
नेपाल के तराई क्षेत्रों में सांप्रदायिक हिंसा और हिंसक झड़पों के बाद यूपी की सीमाओं पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर है। सीमा पार हिंसा भड़कने के बाद यूपी में नेपाल से सटी 579 किलोमीटर खुली सीमा पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। जिसके बाद से सीमा पर निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है। पुलिस, सशस्त्र सीमा बल और खुफिया एजेंसियों ने चेक पोस्ट समेत संवेदनशील रास्तों और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों में सतर्कता बढ़ा दी है।
यूपी के सात जिले पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज में 1047 किमी के क्षेत्र को नेपाल सीमा से सटा इलाका कवर करती है। बलरामपुर में कोइलाबास सीमा पार और जरवा व पचपेड़वा थाने के अंर्तगत आने वाले 46 गांवों को विशेष निगरानी में रखा गया है। सभी एजेंसियां अलर्ट मोड पर काम कर आने जाने वालों पर विशेष निगरानी कर रही है।
निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई – बलरामपुर के एसपी विकास कुमार ने बताया कि बॉर्डर चौकियों और संवेदनशील रास्तों पर अतिरिक्त इंतज़ाम किए गए हैं। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने, अफ़वाहें न फैलाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की। सीमा से सटे दूसरे जिलों में भी सीमा पर निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है।पीलीभीत में पूरनपुर और माधोटांडा सेक्टरों में एसएसबी और पुलिस की संयुक्त गश्त बढ़ा दी गई है, और सरहद पार आने-जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले संवेदनशील इलाकों पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
एसएसबी-पुलिस की संयुक्त गश्त तेज – इसी तरह के सुरक्षा उपाय अन्य सीमावर्ती जिलों में भी लागू किए गए हैं। पीलीभीत में, पूरनपुर और माधोटंडा सेक्टरों में एसएसबी-पुलिस की संयुक्त गश्त तेज कर दी गई है, जिसमें सीमा पार आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे/वैकल्पिक रास्तों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सिद्धार्थनगर में एसएसबी की 43वीं बटालियन और ज़िला पुलिस ने अलीगढ़वा, ककरहवा, लोटन और खुनवा जैसे बॉर्डर ट्रांज़िट पॉइंट और संवेदनशील गांवों में गश्त बढ़ा दी है, ताकि बिना इजाज़त आवाजाही को रोका जा सके।
बॉर्डर इलाकों में बैठक – बहराइच में जिला मजिस्ट्रेट अक्षय त्रिपाठी और एसपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए बॉर्डर इलाकों में एसएसबी अधिकारियों और ग्राम प्रधानों के साथ बैठक की। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि न केवल तय क्रॉसिंग पॉइंट्स पर, बल्कि जंगल के रास्तों, पगडंडियों और अन्य संवेदनशील रास्तों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हर यात्री की पहचान की जांच की जा रही है और दोपहिया वाहनों, कारों और कमर्शियल वाहनों की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि हिंसा शुरू होने के बाद से सीमा पार आवाजाही कम हो गई है। रियल-टाइम जानकारी साझा करने के लिए एसएसबी और नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स के बीच तालमेल बढ़ाया गया है।
पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने उठाए गंभीर सवाल – पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट भी नेपाल सीमा से सटे इलाकों में हो रही गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं। उन्होंने एक्स पर वीडियो शेयर कर घटना की जानकारी दी थी, उन्होंने कहा था कि 26 जुलाई की रात सुनसारी के देवानगंज में मंदिर के पास तेज डीजे बजाने और धार्मिक झंडा हटाने की बात पर दो पक्षों में कहासुनी हो गई। देखते ही देखते 29 जुलाई को यह तनाव इतना बढ़ा कि हिंसक झड़प हो गई, जिसमें पुलिस फायरिंग के दौरान 24 साल के एक युवक की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।
उन्होंने बताया कि ये है कि ये सिर्फ एक जगह का हाल नहीं है। बीरगंज, नेपालगंज और जनकपुर जैसे शहरों में भी कभी सोशल मीडिया की भड़काऊ पोस्ट को लेकर, कभी मस्जिद-मंदिर के बाहर विवाद तो कभी जुलूसों पर पथराव की वजह से माहौल खराब हो रहा है। नेपाल के तराई इलाकों में झगड़े की वजहें हर जगह एक जैसी ही दिख रही हैं। कहीं जबरन धार्मिक झंडे बदले जा रहे हैं, कहीं नफरती अफवाहें फैलाई जा रही हैं, तो कहीं लाउडस्पीकर की आवाज और चुनावों के चक्कर में नेताओं की राजनीति काम कर रही है। लकी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर समय रहते इन नफरती अफवाहों और विवादों पर रोक नहीं लगी, तो इसका असली नुकसान दोनों तरफ की आम और गरीब जनता को ही उठाना पड़ेगा।
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