
यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे E4 देशों ने ईरान को बड़ी राहत दी है। इन मुल्कों ने कहा है कि ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने के लिए तैयार हैं। ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि अमेरिका के साथ शांति समझौते में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम सीमित करने और न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाने का वादा किया है। दुनिया के ये चार अहम मुल्क बैन हटाते हैं तो खासतौर से यूरोप में ईरान को आर्थिक तौकर पर बड़ी राहत मिल सकती है।
फ्रांस, यूके, जर्मनी और इटली के नेताओं की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करना चाहिए। हम इस मकसद के लिए अमेरिका, ईरान और IAEA (संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी) के साथ मिलकर काम करने को पूरी तरह तैयार हैं। बयान में लेबनान की स्थिरता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भी समर्थन को दोहराया गया है।
हम इस कूटनीतिक सफलता के लिए अमेरिका, ईरान और इसमें शामिल पाकिस्तान, कतर और दूसरे मध्यस्थों को बधाई देते हैं। यह क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का एक अवसर है। हमारी अपील है कि हम समझौते को तेजी से और पूरी तरह लागू किया जाए।
ईरान पर पश्चिम के प्रतिबंध – अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूके और दूसरे पश्चिमी देशोंने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसकी वजह ईरान का परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और विदेशों में प्रॉक्सी को बढ़ाना देना कहा गया है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।
अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों से ईरान का अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वह अपना तेल दुनिया के बड़े हिस्से में इन प्रतिबंधों की वजह से नहीं बेच पाता है। फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूके अगर नरम पड़ते हैं तो ईरान के लिए यूरोप में व्यापार और दूसरे अहम मुद्दों पर काफी फायदा होगा।
ईरान-अमेरिकी डील – अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने पर समझौता हो गया है। मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के उप विदेश मंत्री की ओर से इसकी पुष्टि की गई है। शहबाज शरीफ ने कहा है कि दोनों पक्षों स्विट्जरलैंड में 19 जून को इस समझौते पर दस्तखत करेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जब शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर होंगे और होर्मुज से तेल की आवाजाही निर्बाध रूप से शुरू हो जाएगी। ईरान के उप विदेश मंत्री ने सरकारी टीवी पर कहा कि समझौता अंतिम रूप ले चुका है और यह ईरान की बड़ी जीत है। पिलहाल इस समझौते का पूरा विवरण सामने नहीं आया है।
अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी को ईरान पर हमलों के बाद पश्चिम एशिया में लड़ाई शुरू हुई थी। 6 हफ्ते के युद्ध के बाद दोनों पक्षों में 8 अप्रैल को अस्थायी सीजफायर हुआ। इसके बाद समझौते की कोशिशें शुरू हुईं, जो लंबी बातचीत के बाद मंजिल तक पहुंची हैं। 19 जून को दोनों पक्ष समझौते करने पर सहमत हुए हैं।
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