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चीन का महामिशन! आवाज से 26 गुना तेज रफ्तार अंतरिक्ष यान से एस्टेरॉयड को टक्कर मारेंगे वैज्ञानिक, जानें वजह


चीन अपने पहले ‘प्लेनेटरी डिफेंस टेस्ट’ के तहत अंतरिक्ष में एक एस्टेरॉयड यानि क्षुद्रग्रह से मैक 26 यानी ध्वनि की गति से 26 गुना ज्यादा तेज रफ्तार वाले प्रोजेक्टाइल को टकराने की तैयारी कर रहा है। ये प्रोजेक्टाइल एक अंतरिक्ष यान होगा। ये मिशन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ‘डबल एस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट’ (DART) के मुकाबले ज्यादा एडवांस होगा। एक नए पेपर में 2030 से पहले एक स्पेसक्राफ्ट को एस्टेरॉयड से टकराने की योजना बताई गई है।
नासा का DART एक ‘प्रूफ-ऑफ-कांसेप्ट’ था जिसने एक एस्टेरॉयड की कक्षा को थोड़ा सा बदला था। जबकि इसके उलट चीन एक ज्यादा व्यावहारिक प्लैनेटरी डिफेंस टेस्ट करना चाहता है। चीन नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन में प्लैनेटरी डिफेंस के चीफ साइंटिस्ट ली मिंगताओ की अगुवाई वाली टीम ने बताया है कि इसका मकसद पृथ्वी के सापेक्ष एस्टेरॉयड की कक्षा को सीधे तौर पर बदलना ‘या यहां तक कि उसकी संरचना को तोड़ना’ है। यानि पृथ्वी की तरफ बढ़ने वाले एस्टेरॉयड को टक्कर मारकर तोड़ना है ताकि पृथ्वी को नुकसान ना पहुंचे।
चीन का एस्टेरॉयड तोड़ने वाले मिशन का मकसद क्या है? – रिसर्च पेपर के मुताबिक उम्मीद है कि यह स्पेसक्राफ्ट 2029 या 2030 में पृथ्वी के लगभग 7 मिलियन किलोमीटर के दायरे में आने पर 9 किमी/सेकंड से ज्यादा की रफ्तार से अपने टारगेट से टकराएगा जबकि DART की रफ्तार 6.1 किमी/सेकंड थी। चीन नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (CNSA) के प्लैनेटरी डिफेंस के चीफ साइंटिस्ट ली मिंगताओ की अगुवाई में इस मिशन को तैयार किया गया है।
इस प्लान का मकसद पृथ्वी को भविष्य में किसी खतरनाक एस्टेरॉयड के टकराने से बचाना है। चीनी वैज्ञानिक इस टक्कर के जरिए एस्टेरॉयड की कक्षा को सीधे तौर पर बदलना चाहते हैं या जरूरत पड़ने पर उसके ढांचे को तोड़ना चाहते हैं।
कौन सा एस्टेरॉयड है निशाने पर और कब होगी टक्कर? – इसका टारगेट ‘2015 XF261’ नाम का एक कम जाना-पहचाना ‘नियर-अर्थ एस्टेरॉयड’ है जिसे पहली बार 2015 में खोजा गया था।
अनुमान है कि इसका आकार लगभग 30 मीटर है हालांकि इसके सटीक आकार के बारे में अभी भी निश्चितता नहीं है।
यह टक्कर 2029 या 2030 के दौरान होने की उम्मीद है जब यह एस्टेरॉयड पृथ्वी से करीब 70 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा।
इस एस्टेरॉयड के घूमने और बनावट के बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन संभावना है कि यह एक ठोस चट्टान या बहुत मजबूत चीज हो।
एक ही मिशन में दो अंतरिक्ष यान – रिसर्च पेपर के मुताबिक योजना के तहत दो स्पेसक्राफ्ट एक साथ लॉन्च किए जाएंगे और पृथ्वी से निकलने के कुछ ही समय बाद अलग हो जाएंगे।
एक स्पेसक्राफ्ट ‘इम्पैक्टर’ सीधे एस्टेरॉयड की ओर बढ़ेगा और इसका मिशन एस्टेरॉयड को सीधा टक्कर मारना होगा।
दूसरा स्पेसक्राफ्ट ऑब्जर्वर होगा जो टक्कर से पहले, टक्कर के दौरान और उसके बाद एस्टेरॉयड की कक्षा, सतह, मलबे और अंदरूनी बनावट में आने वाले बदलावों पर पैनी नजर रखेगा और उसका डेटा वैज्ञानिकों को भेजेगा।
NASA के ‘डार्ट मिशन’ से कितना अलग है? – आपको बता दें कि इससे पहले अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने साल 2022 में अपने DART (Double Asteroid Redirection Test) मिशन के जरिए एक एस्टेरॉयड का रास्ता सफलतापूर्वक बदला था। हालांकि चीन का यह प्लान नासा के मिशन से काफी ज्यादा एडवांस और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।