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पाकिस्तान का मक्का पैक्ट बनाम UAE-इजरायल, दोनों गठबंधनों की क्या है हकीकत, कौन कितना ताकतवर


सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने हाल में ही रक्षा समझौता किया है। वहीं बीते कुछ महीनों में पश्चिम के अधिकारियों ने साफ किया है कि यूएई पूरी तरह इजरायल के साथ है और इस साझेदारी की कोई सीमा नहीं है। ऐसे में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान की रक्षा संधि को कई विशेषज्ञ यूएई-इजराइल साझेदारी के मुकाबले के तौर पर देख रहे हैं। दोनों गठबंधनों के सामने चुनौतियों और मौकों पर एक्सपर्ट अपने-अपने दावे कर रहे हैं।
एमईई की रिपोर्ट कहती है कि इस साल की शुरुआत में यूएई पर ईरानी ड्रोन और मिसाइलों से हमला हुआ तो इजरायल ने आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम भेजे। यूएई भी ईरान पर हमले करने में इजरायल के साथ शामिल हुआ। दूसरी ओर यमन में हूतियों के सऊदी अरब की जाजान रिफाइनरी पर हमले के खिलाफ पाकिस्तान और तुर्की आगे नहीं आए।
यूएई-इजरायल सहयोग – UAE और इजरायल दशकों से सहयोग कर रहे हैं। 2020 में उनके संबंधों को सार्वजनिक रूप से मान्यता मिली, जब अबू धाबी ने अमेरिका की मध्यस्थता वाले अब्राहम समझौते के तहत इजरायल को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी। अब्राहम समझौते ने वाशिंगटन में UAE के शासक अल-नाहयान परिवार के लिए समर्थन को मजबूत किया है।
विश्लेषकों का कहना है कि UAE और इजरायल के बीच गठबंधन में गहराई की कमी है। कुछ मायनों में मक्का समझौता इसके ठीक उलट है। भू-राजनीतिक सलाहकार अयहम कामेल ने कहा कि यूएई-इजरायल गठबंधन एक राजनीतिक समझौता है। दूसरी ओर मक्का समझौते की नींव सैन्य है लेकिन इसके कई राजनीतिक मायने हैं।
खतरे पर अलग-अलग नजरिए – NATO में तुर्की की सेना दूसरी सबसे बड़ी सेना है। सऊदी अरब अरब दुनिया की एकमात्र G-20 अर्थव्यवस्था है और पाकिस्तान एकमात्र परमाणु हथियार वाला मुस्लिम देश है। सऊदी अरब और पाकिस्तान दशकों से सहयोगी रहे हैं। हलांकि इस सबके बावजूद दोनों देशों के सामने अलग-अलग खतरे हैं।
सऊदी अरब आम तौर पर ईरान को खतरा मानता है। वहीं पाकिस्तान ने हमेशा भारत को ध्यान में रखकर अपनी सैन्य तैयारियां की हैं। कुछ साल पहले तक मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर भी तुर्की और सऊदी अरब के बीच तनाव रहा है। 2019 में तो जमाल खशोगी की हत्या काे मामले पर दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ा था।
कौन सा गुट ज्यादा असरदार – खाड़ी मामलों के विशेषज्ञ नील क्विलियम कहते हैं कि सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की का गठबंधन जटिल है, क्योंकि हर देश अलग-अलग क्षेत्रीय माहौल में काम करता है। तीनों देशों के लिए एक साथ काम करने का तरीका खोजने और आपसी तालमेल के लिए ज्यादा कोशिश और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होगी।
ईरान के खिलाफ लड़ाई ने इजरायल और यूएई के बीच संबंधों को और मजबूत किया है। क्विलियम ने इजरायल-यूएई गुट को ज्यादा असरदार बताया। उन्होंने कहा कि अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से इस रिश्ते को मजबूत होने का समय मिला है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से हमने दोनों देशों को करीब आते देखा है।