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पुतिन के आने से पहले अमेरिका को झटका…भारत-रूस मिलकर लगाने वाले हैं बड़ा फटका!


बीते 18 नवंबर को रूस के मैरीटाइम बोर्ड के अध्यक्ष और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उच्च पदस्थ सहयोगी निकोलाई पेत्रुशेव ने दिसंबर की की शुरुआत में नई दिल्ली में होने वाले 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारियों के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। राष्ट्रपति पुतिन आखिरी बार वार्षिक शिखर सम्मेलन के 21वें संस्करण में भाग लेने के लिए दिसंबर 2021 में भारत आए थे। राष्ट्रपति पुतिन की आगामी भारत यात्रा के दौरान भारत और रूस एक और बड़ी साझेदारी को मजबूत करेंगे। रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ संयुक्त जहाज निर्माण दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक और स्तंभ बन सकता है। भारत और रूस ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है।
नीली अर्थव्यवस्था में सहयोग करेगा भारत – यूरेशियन टाइम्स की एक स्टोरी के अनुसार, निकोलाई पेत्रुशेव के साथ अपनी बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया-राष्ट्रपति के सहयोगी और रूस के समुद्री बोर्ड के अध्यक्ष श्री निकोलाई पेत्रुशेव का स्वागत करके खुशी हुई। हमारे बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग पर सार्थक चर्चा हुई, जिसमें कनेक्टिविटी, कौशल विकास, जहाज निर्माण और नीली अर्थव्यवस्था (समुद्री अर्थव्यवस्था) में सहयोग के नए अवसर शामिल थे। माना जा रहा है कि भारत और रूस आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान समुद्री क्षेत्र को कवर करने वाले एक प्रमुख सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं।
भारत और रूस ऐसी क्या बातचीत कर रहे हैं – रूस और भारत बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे और जहाज निर्माण विशेष रूप से तेल परिवहन के लिए आइस कैटेगरी के टैंकरों के निर्माण में निवेश के माध्यम से पूर्वी समुद्री गलियारे (EMC) और उत्तरी समुद्री मार्ग (NSR) को विकसित करके व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बातचीत कर रहे हैं। आर्कटिक महासागर में आईस के ब्लॉक और जमे हुए पानी से निपटने के लिए मालवाहक जहाजों को सुरक्षित रूप से संचालित करने के लिए भारतीय कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना।