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अमीर देशों की तुलना में भारत-चीन जलवायु सबंधित फंड में दे रहे सबसे अधिक योगदान


भारत-चीन और ब्राजील सहित कुछ विकासशील देश ‘ग्लोबल नार्थ’ के कई देशों की तुलना में बहुपक्षीय विकास बैंकों के माध्यम से जलवायु-सबंधित वित्त में अधिक योगदान दे रहे हैं। जलवायु विज्ञान और नीति पर रिपोर्ट करने वाली ब्रिटेन की एक वेबसाइट के विश्लेषण में यह जानकारी दी गई है। यह विश्लेषण चीन और सऊदी अरब जैसे विकासशील देशों को शामिल करने के लिए जलवायु वित्त के लिए दानकर्ताओं का दायरा व्यापक करने के वास्ते विकसित देशों के दबाव के बीच आया है।
उदाहरण के तौर पर, सितंबर में आयोजित ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ से अपनी अपेक्षाओं पर जलवायु परिवर्तन के विषय में संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) में दी गई दलील में न्यूजीलैंड ने कहा है, “विभिन्न देशों के पास योगदान करने की अलग-अलग क्षमताएं हैं, जो समय के साथ बदल गई हैं।” न्यूजीलैंड ने कहा कि वर्तमान और ऐतिहासिक उत्सर्जन, राष्ट्रीय संपदा और कई अन्य कारक बदल गए हैं और यह लगातार बदल रहे हैं।
तीस साल पुरानी सूचियों के आधार पर विभाजन इस समकालीन वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करता है। विश्लेषण से पता चलता है कि चीन, भारत, ब्राजील और रूस शीर्ष 20 वैश्विक जलवायु वित्त प्रदाताओं में शामिल हैं। विश्लेषण के मुताबिक, चीन ने इस अभियान के तहत 1,236 मिलियन अमेरिकी डॉलर तथा भारत ने जलवायु वित्त के लिए अन्य विकासशील देशों के साथ एकजुटता दिखाते हुए 76.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर प्रदान किए। इसमें कहा गया है कि इस वित्त सहायता का अधिकांश भाग बहुपक्षीय विकास बैंकों के माध्यम से प्रदान किया जाता है।