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‘गुरु का दरवाजा सभी के लिए खुला’, मोहन भागवत का विरोध करने वालों को ब्रिटिश सिख एक्टिविस्ट का करारा जवाब


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत की लंदन यात्रा के दौरान गुरुद्वारे में जाने को लेकर हो रहे विरोध को ब्रिटिश सिख समूहों ने खारिज कर दिया है। ब्रिटिश सिख एसोसिएशन और प्रोफेसर पीटर विरदी जैसे सिख नेताओं ने मोहन भागवत की यात्रा का खुला समर्थन किया है। प्रोफेसर विरदी ने भागवत के दौरे को आस्था से जुड़ा बताया और कहा कि गुरु का दरबार सिख परंपरा के अनुसार सभी के लिए खुला है।
RSS चीफ ने पिछले सप्ताह लंदन स्थित खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे का दौरा किया था। भागवत के दौरे को लेकर कुछ समूहों ने विरोध जताया था और गुरुद्वारा प्रबंधन की आलोचना की थी। सिख फेडरेशन (UK) ने कहा था कि दर्जनों गुरुद्वारों और सिख संगठनों ने ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे में भागवत का स्वागत किए जाने को लेकर विरोध जताया है।
ब्रिटिश सिख एसोसिएशन का समर्थन – इस बीच ब्रिटेन के प्रमुख सिख समूहों ने पूरे विवाद को खारिज करते हुए भागवत के गुरुद्वारे में आने का समर्थन किया है। ब्रिटिश सिख एसोसिएशन ने एक पोस्ट में कहा कि जो सम्मान देता है, वह सम्मान पाने का हकदार है। इसने यह भी कहा कि RSS ने सिखों, साहिबजादों और उनके गुरुओं के प्रति बहुत सम्मान दिखाया है।
सिख एक्टिविस्ट का विरोधियों को जवाब – ब्रिटिश सिख बिजनेसमैन और एक्टिविस्ट प्रोफेसर पीटर विरदी ने भागवत की यात्रा का विरोध करने वालों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा, गुरु का दरवाजा सभी के लिए खुला है। किसी भी इंस्टाग्राम पेज को इसे बंद करने का अधिकार नहीं है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रोफेसर विरदी ने लिखा, RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के खालसा जत्था गुरुद्वारे के दौरे के बारे में मुझे और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। वे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सामने सम्मान प्रकट करने आए थे। मेहमाननवाजी का मतलब समर्थन नहीं होता और बातचीत का मतलब घुटने टेकना नहीं होता।
प्रोफेसर विरदी ने भागवत के दौरे का विरोध कर रहे संगठनों को निशाने पर लिया और कहा, खुद को सिख पुलिस समझने वालों से कहना है कि सोशल पेज बनाने से किसी को सिखी, संगत या गुरु के घर पर अधिकार नहीं मिल जाता। अभद्र भाषा, निजी हमले और घात लगाकर हमला करने के तरीके हिम्मत नहीं दिखाते और ये निश्चित रूप से हमारे गुरुओं की शिक्षाओं को भी नहीं दिखाते।
प्रोफेसर विरदी ने कहा कि वह सही सिख समूहों और किसी भी संगत के साथ बाचतीत को तैयार हैं, लेकिन गुमनाम अकाउंट्स से किए जा रहे ट्रायल के आगे कभी नहीं झुकेंगे। उन्होंने कहा, आप शोर मचाना जारी रख सकते हैं। मैं बातचीत, सेवा और काम जारी रखूंगा। मेरा विश्वास इतना कमजोर नहीं है कि वह बातचीत से डरे।
खालसा जत्था गुरुद्वारे में मोहन भागवत का स्वागत करने वाले भारतीय सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने भी विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भागवत के दौरे को लेकर हो रहे विरोध पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि भागवत एक श्रद्धालु के तौर पर वहां गए थे। उन्होंने रुमाला साहिब भेंट किया, प्रार्थना की, कड़ा प्रसाद ग्रहण किया और गुरुद्वारे के मैनेजमेंट के साथ सिख इतिहास और मूल्यों पर बातचीत की।
साहनी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दरबार साहिब दौरे का जिक्र किया और कहा कि कांग्रेस और 1984 के सिख नरसंहार से जुड़े दर्दनाक इतिहास के बावजूद उन्हें एक श्रद्धालु के तौर पर अंदर जाने, प्रार्थना करने और सेवा करने की इजाजत दी गई थी। साहनी ने कहा, “सिख खालिस्तानी नहीं होते और खालिस्तानी सिखों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। सिख समुदाय ने भारत की आजादी और एकता के लिए बेमिसाल कुर्बानियां दी हैं। हमें गर्व है कि हम सिख हैं, पंजाबी हैं और भारतीय हैं।”