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सिंधु संधि पर कोर्ट के आदेश को अमेरिका में भारतीय दूतावास ने ‘कचरे के डिब्बे’ में फेंका, दिया करारा जवाब


सिंधु जल संधि पर हेग अदालत के आदेश का झुनझुना बजा रहे पाकिस्तान को वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने दो टूक जवाब दिया है। भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया है ‘भारत का रुख साफ और एक जैसा रहा है। तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ का गठन सिंधु जल संधि का उल्लंघन करते हुए गैर-कानूनी तरीके से किया गया था। अंतरिम उपायों और संधि की स्थिति पर इसके ‘फैसले’ की कोई कानूनी अहमियत नहीं है। भारत ने कभी इस संस्था को मान्यता नहीं दी है और कभी इसके सामने पेश नहीं हुआ और न ही इसके फैसलों को मानेगा। सिंधु जल संधि से जुड़े संप्रभु फैसले पूरी तरह भारत के हाथ में हैं। यह संधि अभी स्थगित है।’
यानि भारतीय दूतावास ने फैसले का पेपर लेकर उछलने वाले पाकिस्तान के मुंह पर फैसला फेंक दिया है। भारत ने साफ कर दिया है कि वो अपने स्टैंड पर कायम है कि ‘खून और पानी एकसाथ नहीं बह सकते।’ भारत ने साफ कर रखा है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को बंद नहीं करता है भारत इस संधि को बहाल नहीं करेगा। इसके अलावा वर्ल्ड बैंक पहले ही सिंधु जल संधि में दखल देने से इनकार कर चुका है।
भारतीय राजदूत पहले ही सुना चुके हैं फैसला – इससे पहले इसी महीने न्यूजवीक में लिखे गये एक लेख में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा था कि सिंधु जल संधि (IWT) को रोके रखने का भारत का फैसला असल में उस चीज को ही मानता है जिसे पाकिस्तान के बर्ताव ने पहले ही खत्म कर दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्लामाबाद ने दशकों तक उस ‘सद्भावना और दोस्ती’ को कमजोर किया जिस पर 1960 का समझौता आधारित था।
न्यूजवीक मैगजीन में छपे एक लेख में क्वात्रा ने कहा था कि यह समझौता ‘सद्भावना और दोस्ती की भावना’ के साथ किया गया था लेकिन पाकिस्तान ने ‘आधी सदी उस सद्भावना और दोस्ती को खत्म करने में बिता दी’। उन्होंने लिखा था ‘यह याद रखना जरूरी है कि समझौते की प्रस्तावना में कहा गया है कि यह ‘सद्भावना और दोस्ती की भावना’ के साथ किया गया था। पाकिस्तान ने उस सद्भावना और दोस्ती को खत्म करने में आधी सदी बिता दी। इसे रोके रखने का फैसला बस उस बात को मानता है जिसे पाकिस्तान के बर्ताव ने पहले ही खत्म कर दिया था।’