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भारत को इसीलिए सलाम करती है दुनिया…क्वॉड फोरम से तेल-गैस सप्लाई सुनिश्चित की, रेयर अर्थ पर चीन का तोड़ा गुरूर


भारत की कूटनीति बेहद जबरदस्त है, जिसकी पूरी दुनिया कायल है। उसने एक साथ नई दिल्ली में दो आयोजन किए। पहला तो ये कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को भारत बुला लिया। ठीक उसी समय उसने चार देशों के समूह क्वॉड (QUAD) का भी आयोजन कर लिया। इन दोनों आयोजनों से दो बातें पक्की कर लीं। एक तो क्वॉड देशों का फ्यूल सिक्योरिटी फोरम बनवा लिया, वहीं दूसरी ओर रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई पर चीन के दबदबे को तोड़ते हुए अमेरिका से हाथ भी मिला लिया। वेडनेसडे बिग टिकट में इसे समझते हैं।
क्वॉड का फ्यूल सिक्योरिटी फोरम बनवाया – अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत से मिलकर बने रणनीतिक समूह QUAD ने हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पहल आयोजित करने की अपनी मंशा का ऐलान कर दिया। इसके तहत रणनीतिक कच्चे तेल भंडार बनाने और आपातकालीन हालातों में कच्चे तेल की सप्लाई बनाए रखने पर सहमति बनी। यह पहल ऐसे वक्त बनी, जब भारत समेत क्वॉड के कुछ सदस्य देशों सहित दुनिया पश्चिम एशिया युद्ध के कारण एनर्जी सप्लाई में रुकावट का सामना कर रही है। साथ ही भारत-अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स पर चीन के दबदबे का तोड़ भी निकाल लिया है।
द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्वॉड ने आपसी चर्चाओं के तालमेल और सहयोग को सुगम बनाने के लिए एक ईंधन सुरक्षा मंच ( QUAD Fuel Security Forum ) बनाने का फैसला लिया है।
क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मंगलवार को जारी ऊर्जा सुरक्षा पहल पर एक बयान के अनुसार, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण से एकजुट हैं, जो मजबूत आर्थिक और ऊर्जा प्रणालियों पर आधारित है।
QUAD: तेल-गैस की सप्लाई सुरक्षित बनी रहेगी – इस बयान के अनुसार, ‘वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बदलाव और बढ़ती भू-राजनीतिक जटिलताओं को देखते हुए हम ऊर्जा स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। हम मानते हैं कि वैश्विक बाजारों में खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों से जुड़े बाधा पहुंचने का हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हमारे नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा और लचीलेपन पर सहयोग करने की स्पष्ट सामूहिक मंशा जताई है।’
विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने कहा, ‘क्वॉड का प्रयास क्वाड के साझेदारों द्वारा प्रदान किए जाने वाले अनूठे संसाधनों का लाभ उठाने के मकसद से किया गया है।’
दो समुद्री पहलों पर भी काम करेगा QUAD – वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि क्वॉड दो समुद्री पहलों पर काम करेगा। एक निगरानी क्षमताओं को एकीकृत करने वाली और दूसरी समुद्र में वाणिज्यिक यातायात को एडवांस वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करने वाली। क्वॉड सदस्यों ने फिजी में संयुक्त रूप से एक बंदरगाह बनाने पर सहमति जताई है।
चीन के रेयर अर्थ मिनरल्स के दबदबे का मिला तोड़ – भारत और अमेरिका ने मंगलवार को महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ मिनरल्स की सीरीज पर द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य चीन द्वारा आपूर्ति श्रृंखलाओं के शस्त्रीकरण की पृष्ठभूमि में सुरक्षित और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ-पृथ्वी खनिजों के खनन और प्रसंस्करण में आपूर्ति सुनिश्चित करने संबंधी इस रूपरेखा पर विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी चार दिवसीय यात्रा के समापन दिवस पर हस्ताक्षर किए।
इसी दौरान, क्वाड के विदेश मंत्रियों ने यहां मुलाकात की और महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित एक पहल की रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की, जिसमें समूह के साझेदारों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को निर्धारित किया गया है, जिसमें हर साझेदार की घरेलू नीतियों और प्राथमिकताओं का उचित ध्यान रखा गया है।
क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत-अमेरिका में गठजोड़ – क्वॉड साझेदार माइनिंग, प्रॉसेसिंग और रिसाइक्लिंग सहित क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई को मजबूत करने के लिए नए और मौजूदा प्रयासों के माध्यम से सरकार और निजी क्षेत्र से 20 अरब डॉलर तक का समर्थन जुटाने का इरादा रखते हैं। अन्य क्षेत्रों में नियामक सामंजस्य और समग्र पर्यावरण और क्रिटिकल मिनरल्स की माइनिंग, प्रॉसेसिंग और रिसाइक्लिंग शामिल है।
एक अधिकारी ने बताया कि भारत-अमेरिका के इस समझौते का उद्देश्य खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और संबंधित निवेशों सहित महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग को गहरा करना है। विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, ‘इस समझौते पर हस्ताक्षर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फरवरी 2025 में वॉशिंगटन डीसी की यात्रा के दौरान जताए गए दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।’