
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जलवायु संबंधी जिम्मेदारियों को लेकर विकसित देशों को जमकर सुनाया है। उन्होंने अमीर देशों और यूरोपीय संघ से सवाल किया कि वे ‘ग्लोबल साउथ’ यानि विकासशील देशों के लिए किए गए अपने ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ यानि जलवायु वित्तपोषण के वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है।
बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में एक गोलमेज चर्चा को संबोधित करते हुए गोयल ने विकसित देशों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में इन देशों का सबसे बड़ा हिस्सा रहा है लेकिन इसके बावजूद वे पेरिस समझौते के तहत विकासशील और कमजोर देशों को दी जाने वाली वित्तीय और तकनीकी सहायता के अपने वादों से मुकर गए हैं।
100 अरब डॉलर के वादे पर यूरोपीय देशों को सुनाया – इस दौरान कार्यक्रम की होस्ट काफी नर्वस नजर आ रहीं थीं और नाटकीय अंदाज में हाथ हिला रहीं थीं। इस दौरान पीयूष गोयल ने कहा ‘2015 के पेरिस जलवायु सम्मेलन में जब पूरी दुनिया एक साथ आई थी, तब प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ग्लोबल साउथ’ को एकजुट किया और देशों को COP21 में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबद्ध होने के लिए प्रोत्साहित किया। इस बात पर सहमति बनी थी कि विकसित देश, जिन्होंने कई दशकों तक जलवायु को नुकसान पहुंचाकर फायदा उठाया है, वे बड़ी कीमत चुकाएंगे। साथ ही वे विकासशील और कम विकसित देशों, और प्रशांत और कैरेबियन क्षेत्रों के द्वीपीय देशों की मदद करेंगे… हर साल 100 अरब डॉलर। यही वह प्रतिबद्धता थी।’
पीयूष गोयल ने कहा कि इस बात के कई वर्ष बीत चुके हैं लेकिन यूरोपीय देशों ने एक ढेला तक नहीं दिया है। लंबे समय से कोई कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताते हुए गोयल ने कहा ‘ग्यारह साल बीत जाने के बाद भी हमें इसमें से एक पैसा भी नहीं मिला है। यह सब सिर्फ वादे हैं। यह एक ऐसा बड़ा सवाल है जिसका जवाब देने में यूरोपीय संघ और CBAM (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) नाकाम रहे हैं।’
‘यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज’ क्या था? – दरअसल साल 2009 में कोपेनहेगन में आयोजित ‘यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज’ (UNFCCC) के 15वें सम्मेलन (COP15) में विकसित देशों ने विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 2020 तक हर साल संयुक्त रूप से 100 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का वादा किया था।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 28 जुलाई 2022 को एक बयान में कहा कि 2015 में पेरिस में हुए COP21 सम्मेलन में विकसित देशों ने अपना वादा पूरा नहीं किया, जिसमें प्रति वर्ष 100 अरब अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य को 2025 तक बढ़ाने का फैसला लिया गया था।
उन्हें उनके वादों की याद दिलाते हुए गोयल ने आगे कहा ‘वे कम विकसित देशों की जरूरतों को पूरा करने या उनके डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) के प्रयासों में मदद करने में नाकाम रहे हैं।’ गोयल ने पश्चिमी देशों और भारत के बीच जनसंख्या के आकार और कार्बन उत्सर्जन के स्तर में मौजूद भारी असंतुलन की ओर भी ध्यान दिलाया।
ओजोन को नुकसान पहुंचा इसका जिम्मेदार कौन है? – गोयल ने आगे कहा ‘आखिर इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कौन है? ओजोन परत को नुकसान कहां पहुंचा? वातावरण में इतना सारा कार्बन किसने भेजा? मैं दुनिया की 17% आबादी का प्रतिनिधित्व करता हूं लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में मेरा योगदान 3% से भी कम है। आप (यूरोप) शायद दुनिया की 3% या 4% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं फिर भी इन कार्बन उत्सर्जन या इस गड़बड़ी में आपका योगदान बहुत बड़ा है। यह समस्या आपके कारण पैदा हुई है।’
भारत की घरेलू विकास संबंधी जरूरतों और तेजी से हो रहे ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन (हरित ऊर्जा की ओर बदलाव) का जिक्र करते हुए गोयल ने अपनी बात कहते हुए कहा ‘मुझे 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को भी पूरा करना है। मुझे उनकी ऊर्जा संबंधी जरूरतों और भोजन की जरूरतों को पूरा करना है और यह सुनिश्चित करना है कि मेरा देश सुरक्षित रहे। इन सबके बावजूद, हमारे पास दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) कार्यक्रमों में से एक है।’
Home / Uncategorized / ‘गंदगी आप फैलाएं और कीमत हम चुकाएं?’, पश्चिमी देशों को पीयूष गोयल ने जमकर सुनाया, हकलाने लगी एंकर
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