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मार्को रुबियो जानबूझकर बन रहे अनजान! डोनाल्ड ट्रंप खुद करते हैं भारतीयों पर नस्लीय टिप्पणी, ये है सबूत


अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समय भारत के दौरे पर हैं। रविवार को दिल्ली में एस जयशंकर के साथ प्रेस वार्ता के दौरान उनसे अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद पर सवाल किया गया। इस सवाल को अमेरिकी विदेश मंत्री ने टालने की कोशिश करते हुए कहा कि दुनिया में हर जगह कुछ बेवकूफ लोग हो सकते हैं। रुबियों ने भले ही इसे कम गंभीर दिखाने की कोशिश की है लेकिन सच्चाई ये है कि खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को नरक (हेल हॉल) कहने वाली पोस्ट हालिया दिनों में शेयर की हैं।
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया है कि कैसे अमेरिका में दक्षिणपंथी इन्फ्यूएंसर लगातार भारतीयों और चीनियों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणी करते रहे हैं। इस पर ट्रंप का सहयोग भी कई बार उनको मिलता रहा है। ऐसे में मार्को रुबियो दिल्ली में हैं तो उनके सामने ट्रंप की वजह से पैदा हुई स्थितियों को संभालने की चुनौती है।
डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर टिप्पणियां – डोनाल्ड ट्रंप ने कई दफा ऐसी टिप्पणियां की है, जो भारत के लिए सम्मान का भाव नहीं रखती हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने बीते साल भारत पर ऊंचे टैरिफ लगाकर भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की थी। इस दौरान ट्रंप ने कई मौकों पर भारत की अर्थव्यवस्था और गरीबी पर कमेंट किए थे।
अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने 2000 के दशक की शुरुआत से ही भारत के साथ गहरे रिश्ते बनाने पर जोर दिया था। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मौजूदा कार्यकाल में इस स्थिति को पूरी तरह से पलट दिया है। लेखक अनंत कृष्णन का कहना है कि भारत-अमेरिका संबंधों की मौजूदा दिशा और जिस तरह से दोनों देशों के रिश्ते बिगड़े हैं, उसे लेकर गहरी चिंता है।
मेरा मानना है कि रक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच जो गहरे संबंध बने हैं, उनमें मजबूती है लेकिन फिर भी यह बात हैरान करने वाली है कि क्षेत्र में भारत को अहम साझीदार के तौर पर देखने का जो नजरिया था, वह बदल गया है। नंत कृष्णन
अमेरिकी अधिकारी भी कर रहे बयानबाजी – अमेरिकी विदेश विभाग के उप सचिव क्रिस्टोफर लैंडौ ने दिल्ली में ‘रायसीना डायलॉग’ में यह कहकर चौंका दिया कि अमेरिकी सरकार भारत को एक आर्थिक और रणनीतिक खतरे के तौर पर देख सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीयों को यह समझना चाहिए कि हम भारत के साथ वैसी ही गलतियां नहीं दोहराने वाले हैं, जैसी हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं।