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बांग्लादेश के साथ हो गया बड़ा खेल! शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनते ही कूटनीतिक उलटफेर, भारत के 5 बड़े कदम


पश्चिम बंगाल में सरकार बदलते ही भारत-बांग्लादेश संबंधों में बहुत बड़े कूटनीतिक बदलाव की नींव पड़ चुकी है। इसकी तैयारी मोदी सरकार ने पश्चिम बंगाल में चुनाव अभियान के समय से ही शुरू कर दी थी। शायद केंद्र सरकार को पहले से अंदाजा था कि बंगाल में बहुत बड़ा राजनीतिक बदलाव होना तय है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालते ही एक से बढ़कर एक ताबड़तोड़ ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे बांग्लादेश को अपनी पिछली गलतियों का एहसास हो रहा होगा।
पश्चिम बंगाल चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था। सरकार बनाने के बाद बीजेपी ने जो बड़े फैसले लिए उससे साफ है कि बीजेपी के लिए यह मुद्दा गंभीर है, क्योंकि उसने एक के बाद इससे जुड़े तमाम कदम उठाए हैं, जिसकी आशंका पड़ोसी देश के नेताओं की ओर से पहले से ही जताई जा रही थी।
बंगाल में डिटेंशन सेंटर की शुरुआत – पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार ने सभी 23 जिलों में अवैध घुसपैठियों के लिए डिटेंशन सेंटर या ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाना शुरू कर दिया है।
इन ‘होल्डिंग सेंटर’ में अवैध बांग्लादेश और रोहिंग्या घुसपैठियों को रखा जाएगा।
इन ‘होल्डिंग सेंटर’में अवैध घुसपैठियों को तबतक रखा जाएगा, जब तक उन्हें उनके देश वापस न भेज दिया जाए।
केंद्र सरकार ने इस तरह के सेंटर बनाने के लिए एक साल पहले ही राज्य सरकार को दिशा-निर्देश भेज दिया था, लेकिन ममता बनर्जी सरकार ने इसपर एक कदम भी नहीं बढ़ाया।
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही कह दिया कि उनकी सरकार इसको लेकर ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ के सिद्धांत का पालन करेगी।
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग शुरू – शुभेंदु अधिकारी ने कार्यभार संभालते ही जो बड़े फैसले लिए हैं, इसमें बीएसएफ को भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए 27 किलोमीटर जमीन सौंपना शामिल है।
इसके अलावा बंगाल सरकार ने बॉर्डर आउटपोस्ट और बीएसएफ के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अलग से जमीन भी दी है।
बीएसएफ ने जमीन मिलते ही सिलीगुड़ी क्षेत्र में फेंसिंग का काम शुरू भी कर दिया है।
शुरू में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने फेंसिंग के काम में रुकावट पैदा करने की कोशिश भी शुरू की, लेकिन बीएसएफ ने फ्लैग मीटिंग में दो टूक बता दिया कि यह काम रुकने वाला नहीं है, क्योंकि यही अब न्यू नॉर्मल है।
बांग्लादेश में बंगाल के नेता करेंगे भारत का प्रतिनिधि – भारत ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को
बांग्लादेश का नया हाई कमिश्नर नियुक्त कर दिया था।
मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री रह चुके दिनेश त्रिवेदी पश्चिम बंगाल से लोकसभा और राज्यसभा दोनों का ही लंबे समय तक प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
दिनेश त्रिवेदी जैसे दिग्गज बंगाली नेता को ढाका में भारत का प्रतिनिधि बनाकर भेजना इस वजह से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें पड़ोसी मुल्क की वजह से प्रदेश को होती रही पीड़ा की बहुत ही अच्छी समझ है।
उनके लिए बांग्लादेश के सामने भारत की सुरक्षा चिंताओं को कूटनीतिक तौर पर मजबूती से रखना ज्यादा आसान होगा।
ढाका जाने से पहले आर्मी चीफ से मिले दिनेश त्रिवेदी – भारत-बांग्लादेश के बीच रक्षा संबंध, सीमा सुरक्षा कितनी अहम है, इसका अंदाजा इसी से लगता है कि बांग्लादेश जाने से ठीक पहले दिनेश त्रिवेदी ने आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की।
बांग्लादेश में जबसे पूर्व पीएम शेख हसीना को प्रधानमंत्री के पद से जबरन हटाया गया और उन्हें भारत आकर अपनी जान बचाने को मजबूर होना पड़ा, वह भारत के लिए एक बहुत ही बड़ी सुरक्षा परेशानी बन चुका है।
खासकर मोहम्मद यूनुस की सरकार के कार्यकाल में तो बांग्लादेश पर पूरी तरह कट्टरपंथी ताकतों का कब्जा हो चुका था और वहां भारत-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया।
बांग्लादेश में अब नई सरकार है, जो किसी न किसी रूप में चुनावों के आधार पर बनी है, इसलिए भारत की उम्मीदें बरकरार हैं।
लेकिन, भारत अभी भी अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर सचेत है और इस वजह से आर्मी चीफ से दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात के मायने बदल जाते हैं।
बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान को भारत का संदेश – ढाका से स्वदेश वापसी से पहले बांग्लादेश में भारत के मौजूदा उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने वहां के पीएम तारिक रहमान से रविवार को विदाई मुलाकात की।
उन्होंने बांग्लादेश से विदा लेने से पहले तारिक रहमान को भारत का साफ संदेश पहुंचा दिया कि हम आपसी फायदे और साझा समृद्धि के लिए दोनों देशों के लोगों के बीच बहुआयामी जुड़ाव को और गहरा करने में दिलचस्पी रखते हैं।
मतलब, भारत बांग्लादेश की समृद्ध में हर तरह से सहयोग को तैयार है, लेकिन पड़ोसी देश को भी भारत के सुरक्षा हितों का ध्यान रखना पड़ेगा, जिसमें अब किसी तरह से समझौता नहीं किया जा सकता।