
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को सरकार बनाए दो महीने पूरे हो चुके हैं। उन्होंने बदलाव के नाम पर चुनाव जीता और सरकार बनाई। हालांकि, उनकी सरकार शुरू से ही विवादों में घिरी रही। अब नेपाल के युवा भी बालेन शाह सरकार को पसंद नहीं कर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण चुनावी वादों को पूरा करने के प्रति उनकी अनिच्छा है। नेपाल के सरकारी ट्रैकर के अनुसार, बालेन शाह सरकार कई अहम वादों को पूरा करने में तय समय से पीछे चल रही है। इतना ही नहीं,उनके प्रशासन के भीतर राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव के शुरुआती संकेत भी उभरने लगे हैं।
मंत्रियों के इस्तीफों ने दिया सबसे बड़ा झटका – सरकार बनने के एक महीने के अंदर दो मंत्रियों के इस्तीफे ने बालेन शाह सरकार को सबसे बड़ा झटका दिया था। सबसे पहले बालेन शाह सरकार में श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार शाह को पद के दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के आरोप में 9 अप्रैल 2026 को बर्खास्त कर दिया गया था। उन पर अपनी पत्नी को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में बनाए रखने के लिए पद का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगा था, जिसके बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके पद से हटा दिया था। इसके बाद नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने ऊपर उठ रहे सवालों और शेयर निवेश से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए, उन्होंने कार्यकाल के महज 26वें दिन नैतिक आधार पर यह कदम उठाया था।
बालेन शाह सरकार की आलोचना क्यों हो रही – इसके अलावा बालेन शाह सरकार अहम फैसलों पर कानूनी विवाद, शासन शैली पर बढ़ती निगरानी को लेकर आलोचना के केंद्र में रही। सरकार ने अध्यादेशों की भरमार लगा दी। उसने संस्थागत प्रक्रियाओं को दरकिनार किया, राजनीतिक लाभ के लिए शीर्ष नेताओं की गिरफ्तार कराया। इन कदमों ने लोगों की नजरों में बालेन शाह सरकार की इज्जत को गिराया है। इतना ही नहीं, बालेन शाह ने कई ऐसे कदम भी उठाए, जिनका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ। इनमें लोगों के घरों को बुलडोजर से तोड़ा जाना और भारत से लगी सीमा पर कस्टम जांच के नाम पर लोगों को प्रताड़ित करने के कदम भी शामिल हैं।
लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में नाकाम रहे बालेन शाह – बालेन शाह नेपाली जनता की अभूतपूर्व उम्मीदों की लहर पर सवार होकर सत्ता में आए। यह लहर पिछले साल तब पैदा हुई थी, जब नेपाल में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और बेरोजगारी के खिलाफ Gen Z (युवा पीढ़ी) के नेतृत्व में एक आंदोलन छिड़ा था। इस आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था और देश की राजनीतिक व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया था। इसके बाद हुए चुनावों में, युवा मतदाताओं ने 35 वर्षीय रैपर बालेन शाह को अपना नेता बनाया। उन्हें उम्मीद थी कि बालेन पारंपरिक राजनीति से हटकर कुछ नया और निर्णायक बदलाव लाएंगे।
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