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मम्मी-पापा की इन 5 बातों पर बचपन में होती थी चिढ़, खुद पेरेंट्स बनने के बाद समझ आती है उनकी अहमियत


बचपन में माता-पिता की कुछ बातें बच्चों को बिल्कुल पसंद नहीं आतीं। इनमें ‘हम तुम्हारी भलाई के लिए कह रहे हैं’, ‘अभी तुम्हें समझ नहीं आएगा’ और ‘जब खुद पेरेंट्स बनोगे, तब पता चलेगा’ जैसी बातें शामिल हैं। इन्हें सुनकर अक्सर झुंझलाहट होती थी और लगता था कि मम्मी-पापा बेवजह नसीहत देते रहते हैं। उस समय उनकी सीख बच्चों को सख्ती या रोक-टोक लगती थी। लेकिन उम्र और जिम्मेदारियों के साथ नजरिया बदलने लगता है। खासकर जब वही बच्चे खुद माता-पिता बनते हैं, तब उन्हें एहसास होता है कि मम्मी-पापा की डांट, सख्ती और रोक-टोक के पीछे सिर्फ उनकी चिंता और बच्चों की भलाई छिपी होती थी। वैश्विक माता-पिता दिवस (Global Day of Parents 2026) पर जानते हैं ऐसी ही 5 बातों के बारे में व‍िस्‍तार से, जिनकी अहमियत समय के साथ समझ आती है।
बेटा, तुम्‍हारी भलाई के ल‍िए ही समझाते हैं – अक्सर माता-पिता बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान देने, समय की कद्र करने और अपने लक्ष्य पर फोकस रखने की सलाह देते हैं। बचपन में ये बातें सुनकर बच्‍चों को बड़ी झुंझलाहट होती है और लगता है कि मम्मी-पापा हर समय सिर्फ पढ़ाई की ही बात करते हैं। लेकिन जब वही बच्चे बड़े होकर खुद माता-पिता बनते हैं और उनका बच्चा पढ़ाई से जी चुराता है, तब उन्हें अपने मम्मी-पापा की सीख याद आती है। तब एहसास होता है कि वे पढ़ाई के लिए इसलिए कहते थे, क्योंकि वे बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना चाहते थे। उस समय समझ आता है कि मम्मी-पापा वाकई सही कहते थे।
​ सब बच्‍चों को बराबर प्‍यार करते हैं पेरेंट्स – पेरेंट्स अपने सभी बच्चों को बराबर प्यार करते हैं, लेकिन भाई-बहनों के बीच झगड़े में अक्सर बच्चे यह बात समझ नहीं पाते। किसी एक बच्चे की बात का समर्थन होने पर दूसरा बच्चा बुरा मान जाता है और गुस्से में कह देता है कि मम्मी-पापा उसे ज्यादा प्यार करते हैं।
ऐसे में जब माता-पिता समझाते हैं कि वे सभी बच्चों से समान प्यार करते हैं, तब बच्चे अक्सर इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन जब उनके खुद के बच्‍चे ऐसा बोलते हैं, तब वे समझ पाते हैं क‍ि कि माता-पिता का प्यार हमेशा बराबर और बिना भेदभाव के ही होता है। साथ ही उन्‍हें पेरेंट्स की सोच को क‍ितना गलत समझा। Image-Freepik
जब खुद कमाओगे, तब पैसे की कीमत समझ आएगी – बचपन में जब कोई खिलौना, ड्रेस या पसंदीदा चीज दिलाने की जिद पूरी नहीं होती थी, तो बच्चों को बहुत बुरा लगता था। कई बार वे गुस्से में कह देते थे कि इतनी-सी चीज दिलाने में भी मम्मी-पापा बजट देखने लगते हैं। तब माता-पिता अक्सर कहते थे, ‘जब खुद कमाओगे, तब पता चलेगा।’ उस समय यह बात नसीहत लगती थी, लेकिन जब वही बच्चे बड़े होकर कमाने लगते हैं और जिम्मेदारियां संभालते हैं, तब समझ आता है कि हर इच्छा को तुरंत पूरा करना आसान नहीं होता। तभी एहसास होता है कि उनके पेरेंट्स गलत नहीं थे।
खुद पेरेंट्स बनों, तब पता चलेगा – टीनएज में बच्चे अक्सर दोस्तों के घर रुकने, लेट-नाइट पार्टी में जाने या ट्रिप पर जाने की जिद करते हैं। ऐसे में जब माता-पिता सुरक्षा का हवाला देकर मना कर देते हैं, तो बच्चों को यह बात बुरी लगती है। उन्हें लगता है कि उनके पेरेंट्स बहुत ज्यादा रोक-टोक करते हैं या पुराने सोच वाले हैं। लेकिन बड़े होने पर और दुनिया की हकीकत को समझने के बाद एहसास होता है कि उनकी चिंता बेवजह नहीं थी, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और भलाई के लिए थी। साथ ही, फ‍िर यही पांदब‍िया जब वे अपने बच्‍चों पर लगाते हैं, तो उनके बच्‍चे भी उन्‍हें गलत समझने लगते थे और वक्‍त यही ख्‍याल आता है क‍ि मम्‍मी-पापा आपकी एक-एक बात सही थी।
गलत संगत से दूर रहो – टीनएज में दोस्त बहुत अच्छे लगते हैं और कई बार बच्चे सही और गलत संगत में फर्क भी नहीं कर पाते। ऐसे में जब पेरेंट्स समझाते हैं कि किसी गलत दोस्त के साथ मत रहो, तो बच्चों को यह बात रोक-टोक लगती है और वे बुरा मान जाते हैं। लेकिन समय के साथ समझ आता है कि माता-पिता यह बात सिर्फ बच्चों की सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए कहते हैं।