
बांग्लादेश के गाइबांधा जिले में एक प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान के विरोध पर हिंदुओं की नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस घटना के खिलाफ ढाका यूनिवर्सिटी में छात्रों ने मशाल जुलूस निकाला और गाइबांधा में भगवान राम की मूर्ति के निर्माण कार्य को फिर से शुरू करने की मांग की। इसके पहले कट्टरपंथियों के दबाव में गाइबांधा में विशाल हिंदू धार्मिक परिसर का निर्माण कार्य रोक दिया गया था।
कट्टरपंथियों के निशाने पर भगवान राम की मूर्ति – गाइबांधा के पलाशबाड़ी उपजिला में देश की सबसे बड़ी भगवान राम की मूर्ति बनाने का निर्माण कार्य चल रहा था। इसका 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन यह प्रोजेक्ट अब कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गया है। इसे लेकर कट्टरपंथी समूह लगातार धमकिया दे रहे हैं। प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ते तनाव के बीच निर्माण कार्य को रोक दिया गया है।
भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति – NDTV की रिपोर्ट में गाइबांधा पलाशबाड़ी कोमोरपुर श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति के संस्थापक और अध्यक्ष हरिचंद्र दास के हवाले से बताया कि हम सनातन धर्म की शक्ति के मुख्य स्रोतों में से एक भगवान राम की मूर्ति बना रहे हैं। 81 फीट ऊंची मूर्ति का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। लेकिन कुछ कट्टरपंथी समूह अब हमें निर्माण कार्य रोकने पर मजबूर कर रहे हैं।
डर के चलते मूर्ति का रोका गया काम – उन्होंने आगे बताया कि वे डरे हुए हैं और इसी कारण काम रोक दिया गया है। दास ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान, कानून व्यवस्था लागू करने वाले अधिकारियों और नागरिक समाज से अपील की है कि वे इस काम को पूरा किया जाना सुनिश्चित करें।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के प्रमुख संगठन बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद की केंद्रीय समिति ने सरकार से सांप्रदायिक धमकियों पर रोक लगाने और इन घटनाओं को खत्म करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की पुरजोर अपील की है। परिषद ने गाइबांधा में राधा-गोविंद मंदिर को गिराने की लगातार धमकियों पर चिंता जताई है। इसके साथ ही चेतावनी दी कि ऐसी घटनाओं से देश भर में सांप्रदायिक सद्भाव को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
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