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पेशाब करने में होती है चुभन? धीमा पड़ गया है फ्लो? तो हाथ पर हाथ रखकर ना बैठें, आपको है किडनी स्टोन


यूरिन करते समय पेट के निचले हिस्से में दर्द, जलन, पेशाब में खून आना किडनी में पथरी का संकेत हो सकता है। मोटापा, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर और डिहाइड्रेशन की वजह से किडनी स्टोन की संभावना बढ़ जाती है। यदि किडनी स्टोन के लक्षणों को नजअंदाज किया जाए तो यह किडनी की हेल्थ को प्रभावित कर सकती हैं और अन्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
जीवनशैली की खराब आदतों का असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ता है। पानी की कमी, खानपान की आदतों, सुस्त जीवनशैली, मोटापा और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के कारण किडनी की पथरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पथरियों के कुछ मामलों में मरीज को लंबे समय तक कोई लक्षण महसूस नहीं होते हैं। जबकि, कुछ मरीजों को अचानक दर्द महसूस होने लगता है। यह समस्या पुरुष और महिला दोनों को हो सकती है। डॉ. परवेश जैन (सीनियर डायरेक्टर यूरोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी एंड रिनल ट्रांसप्लांट, मैक्स सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज) बताते हैं कि यदि समय पर किडनी स्टोन का इलाज न किया जाए तो यह ब्लैडर और किडनी की अन्य गंभीर समस्या का कारण बन सकता है।
पीठ के पिछले हिस्से में दर्द (Designed By Magnific) – किडनी स्टोन होने पर व्यक्ति को सबसे पहले पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस होता है। यह दर्द अचानक पीछे की पसलियों के नीचे महसूस होता है। जैसे-जैसे स्टोन यूरिनरी ट्रैक्ट से आगे बढ़ता हैं, यह दर्द पेट के निचले हिस्से, जांघों के बीच या प्राइवेट पार्ट की ओर फैल सकता है। इसे ‘रीनल कोलिक’ कहा जाता है। यह दर्द वेव की तरह होता है, क्योंकि स्टोन को नीचे की ओर धकेलने की कोशिश में यूरिनरी ट्रैक्ट सिकुड़ता है। ऐसे में मरीज को हर स्थिति में बैचेनी महसूस होती है।
पेशाब में खून आना (हीमेटुरिया) – पेशाब में खून आना किडनी स्टोन का एक महत्वपूर्ण संकेत है। इस दौरान पेशाब का रंग गुलाबी, लाल, भूरा या चाय की तरह दिख सकता है। किडनी स्टोन की सतह खुरदरी होती है। ऐसे में जब ये स्टोन मूत्र मार्ग से गुजरते हैं, तो वे मूत्र मार्ग की नाजुक अंदरूनी परत को खरोंच सकते हैं या उसमें जलन पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से पेशाब करते समय खून आने लगता है।
किडनी स्टोन के लक्षण (Designed By Magnific) – जैसे-जैसे किडनी स्टोन मूत्र मार्ग में नीचे की ओर खिसकता है, खासकर मूत्राशय (bladder) और मूत्राशय के जोड़ (ureterovesical junction) के पास तब मरीज को पेशाब में जलन और दर्द महसूस होने लगती है। कई बार मरीज इस दर्द को यूटीआई समझ लेते हैं। किडनी स्टोन की वजह से होने वाली जलन के कारण यूरिनरी ट्रैक्ट में सूजन आ जाती है, जिससे पेशाब करते समय तकलीफ होती है। यह दर्द चुभन की तरह महसूस होता है।
बार-बार पेशबा आना (Designed By Magnific) – गुर्दे की पथरी से पीड़ित लोगों को अक्सर बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता महसूस होती है, खासकर जब पथरी ब्लैडर के पास यूरिनरी ट्रैक्ट के निचले हिस्से तक पहुंच जाती है। ऐसे में मरीज को बार-बार शौचालय जाने की इच्छा हो सकती है, भले ही बहुत कम पेशाब आया हो।
बार-बार उल्टी होना – किडनी की पथरी होने पर व्यक्ति को बार-बार उल्टी और मतली होने लगती है। किडनी और पाचन तंत्र का नर्वस सिस्टम आपस में जुड़े होते हैं, जिससे मूत्र प्रणाली पर दबाव पड़ने से यह प्रतिक्रिया होती है। कुछ मामलों में लगातार उल्टी होना यूरिनरी ट्रैक्ट में गंभीर रुकावट और तेज दर्द का संकेत हो सकता है।
बुखार और ठंड लगना – किडनी स्टोन होने पर व्यक्ति को बुखार आता है। यह एक सामान्य लक्षण है। कई बार बुखार यूरिनरी टैक्ट के गंभीर इंफेक्शन की ओर भी संकेत करता है। यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट होने से इंफेक्टेड यूरिन किडनी के अंदर फंस सकता है, जिससे बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे में मरीज को बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, कमजोरी और दिल की धड़कने तेज होना आदि लक्षण महसूस हो सकते हैं।
पेशाब करने में कठिनाई और मात्रा में कमी – गुर्दे की पथरी पेशाब के फ्लो को थोड़ा या पूर्ण रूप से रोक सकती है, जिससे पेशाब करने में कठिनाई या पेशाब की मात्रा में कमी हो सकती है। साथ ही, मरीजों को दबाव भी महसूस हो सकता है। इसमें पेशाब पूरी तरह से नहीं निकल पाता है, या बार-बार कोशिश करने के बावजूद पेशाब नहीं हो पाता है।
किडनी की पथरी से बचाव के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए?
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
डाइट में नमक का सेवन कम करें।
शुगरी ड्रिंक्स का सेवन कम करें।
प्रोसेस्ड फूड को डाइट में शामिल न करें।
रेड मीट जैसे एनिमल प्रोटीन का सेवन संतुलित मात्रा में करें।
मोटापे और वजन के कंट्रोल में करें।
कैल्शियम का सेवन अधिक मात्रा में न करें।
नींबू और संतरे जैसे खट्टे फलों का सेवन कम करें।
ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थों को खाने से बचें।
किडनी की पथरी होने पर दिखाई देने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किडनी से जुड़े गंभीर रोग का जोखिम बढ़ा सकते हैं। किडनी या यूरिन से जुड़े लक्षण दिखाई देने पर आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।