
दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास ने भारत सरकार के सामने सीमा पर हुई एक कथित घटना का मुद्दा उठाया है। इसमें कहा गया है कि भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने नवलपरासी पश्चिम के सुस्ता में नेपाली सीमा में घुसकर स्थानीय ग्रामीणों के बाढ़ से बचाव के लिए बनाए गए मिट्टी के बांध को तोड़ा। नेपाली दूतावास ने रविवार को दिल्ली में इस मुद्दे को भारत के विदेश मंत्रालय के सामने उठाया है। इससे भारत और नेपाल के रिश्ते में फिर तनाव आ सकता है, दोनों देशों में बीते कुछ महीनों में बॉर्डर विवाद से जुड़े मुद्दों पर तनातनी देखी गई है।
काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, नेपाली विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि हमारे अधिकारियों ने उस तरीके का विरोध किया, जिससे भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने अस्थायी बांध को तोड़ा। हमने दिल्ली में उन्हें बताया कि यह स्थानीय लोगों ने बाढ़ के असर को कम करने की आखिरी कोशिश थी, जिसे खत्म कर दिया गया।
क्या है नेपाल का दावा – नेपाली मीडिया ने स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया है कि रविवार को सादे कपड़ों में भारतीय सुरक्षाकर्मियों का एक समूह फावड़े लेकर नेपाली इलाके में घुस आया। उन्होंने उस मिट्टी के तटबंध को खोदने लगा, जिसे ग्रामीणों ने हाल ही में नारायणी नदी के बाढ़ के पानी से बस्ती के डूबने के खतरे को कम करने के लिए बनाया था।
स्थानीय निवासी उन्हें रोकने के लिए दौड़े, जिससे तनाव की स्थिति पैदा हो गई। दावा किया गया कि नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने दखल देकर स्थिति को बिगड़ने से बचाया। बाद में पुराने समझौते के अनुसार, APF और SSB के जवानों ने जल्द ही स्थिति को नियंत्रण में कर लिया। फिलहाल स्थिति सामान्य बताईगई है।
8 दिसंबर 1988 को नेपाल और भारत इस बात पर सहमत हुए थे कि नारायणी नदी को फिक्स्ड बाउंड्री के सिद्धांत के तहत सीमा-नदी माना जाएगा। इस सिद्धांत के तहत सीमा वही बनी रहती है, जो नेपाल-भारत सीमा समझौते पर हस्ताक्षर के समय थी।
बॉर्डर पर तनाव – सुस्ता और कालापानी नेपाल और भारत के बीच सीमा से जुड़े दो बड़े विवाद रहे हैं। भारत और नेपाल के इन इलाकों पर अपने-अपने दावे हैं। विवाद सुलझाने के लिए 2014 में दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए थे कि इस मुद्दे को विदेश सचिवों और बाउंड्री वर्किंग ग्रुप के जरिए सुलझाया जाएगा। हालांकि पिछले 12 सालों में इस विवाद को सुलझाने के लिए विदेश सचिव स्तर पर कोई बैठक नहीं हुई है।
नेपाली विदेश मंत्रालय के दो अधिकारियों ने दावा किया है कि भारतीय पक्ष का कहना था कि सुस्ता और वह जगह जहां नेपाली पक्ष मिट्टी का बांध बना रहा है। वह विवादित इलाके हैं और दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखने पर सहमत हुए थे। दो महीने पहले भी विवाद हुआ था, जब भारत के SSB जवानों ने उसी इलाके में नेपाल सरकार के बाढ़-नियंत्रण के पक्के बांध का निर्माण रोक दिया था।
दिल्ली में उठा मुद्दा – रविवार को जैसे ही नेपाली मीडिया ने इस मामले की खबर दी, नई दिल्ली में नेपाली दूतावास ने भारतीय पक्ष के सामने यह मुद्दा उठाया और जल्द समाधान की मांग की। इस पर भारतीय पक्ष ने संयम बरतने पर जोर देते हुए कहा कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय एजेंडा नहीं बनाया जाना चाहिए। नेपाल के नारायणी नदी के किनारे 132 मीटर लंबा बाढ़-सुरक्षा तटबंध बनाने का ठेका दिए जाने के बाद विवाद बढ़ा है।
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