
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अगले सप्ताह भारत के दो दिवसीय दौरे पर आ सकते हैं। नई दिल्ली की ओर से द्विपक्षीय वार्ता के लिए मिले निमंत्रण के बाद दोनों देशों के बीच संभावित यात्रा को लेकर बातचीत तेज हो गई है। इस दौरे को भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई दूरी को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों के मुताबिक, तारिक रहमान की यात्रा के लिए 20-21 अगस्त या 21-22 अगस्त की तारीखों पर विचार किया जा रहा है। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच 20 से 25 अगस्त के बीच किसी तारीख पर सहमति बनने की संभावना है। यदि दौरा होता है तो यह फरवरी में प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान की पहली भारत यात्रा होगी। तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा मलेशिया की की थी, जिसके बाद उन्होंने चीन का दौरा किया।
पीएम मोदी ने किया था आमंत्रित – हालांकि पद संभालने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा, सितंबर में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में BIMSTEC अध्यक्ष के तौर पर शामिल होने के लिए भी उन्हें आमंत्रण दिया गया है।
दोनों पक्षों का मानना है कि द्विपक्षीय यात्रा भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार और नई शुरुआत के प्रयासों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से कई मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। इनमें बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी प्रमुख है।
किन मुद्दों पर होगी बातचीत? – राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, तारिक रहमान के भारत दौरे के दौरान शेख हसीना के अलावा सीमा प्रबंधन, घरेलू राजनीतिक परिस्थितियां, व्यापार, वीजा व्यवस्था को सामान्य बनाने और जल बंटवारे जैसे मुद्दे अहम रहेंगे।
भारत यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए कुछ परियोजनाओं की पेशकश कर सकती है। इनमें ऊर्जा और बिजली क्षेत्र में सहयोग प्रमुख हो सकता है। ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और बांग्लादेश को भी ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
दोनों देशों के बीच जल बंटवारा भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। गंगा जल संधि दिसंबर में समाप्त होने वाली है, जबकि 2011 से लंबित तीस्ता जल बंटवारा समझौते पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है।
वहीं, भारत की प्राथमिकताओं में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख होंगे। इनमें बांग्लादेश में उग्रवादी संगठनों की गतिविधियां, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और रक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में बांग्लादेश के चीन और पाकिस्तान की ओर संभावित झुकाव जैसे विषय शामिल हैं।
ढाका सरकार में मौजूद कट्टरपंथी कर रहे विरोध – रिपोर्ट के अनुसार, ढाका की मौजूदा सरकार में मौजूद कुछ कट्टरपंथी तत्व और पाकिस्तान समर्थक जमात-ए-इस्लामी तारिक रहमान के भारत के साथ संबंध बढ़ाने के प्रयासों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद नई दिल्ली बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के साथ संवाद बढ़ाने के लिए एक और प्रयास करना चाहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तारिक रहमान का भारत दौरा टलता है, तो दोनों देशों के संबंधों में गतिरोध और बढ़ सकता है। साथ ही द्विपक्षीय रिश्तों के और खराब होने का खतरा पैदा हो सकता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रस्तावित यात्रा को लेकर कहा कि भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि BRICS शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के लिए भी निमंत्रण दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई प्रगति होने पर जानकारी साझा की जाएगी।
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