
वॉशिंगटन: बेटी के यौन शोषण का आरोपी पिता एक कुत्ते की वजह से बेगुनाह साबित हो गया। खुद को दोषी करार दिए जाने से पहले यह शख्स बार-बार कहता रहा कि वो बेगुनाह है, लेकिन अपनी बेगुनाही का सबूत नहीं दे पाने की वजह से उसे 50 साल की सजा सुना दी गई। मामला वॉशिंगटन का है। वॉशिंगटन के रेडमॉन्ड शहर में रहने वाले जोशुआ हॉर्नर पर उनकी बेटी ने यौन उत्पड़ीन का केस दर्ज कराया था। इस मामले में हॉर्नर ने 17 महीने जेल में भी गुजारे, हालांकि अब हॉर्नर आजाद है। लेकिन इन गंभीर आरोपों से बेदाग निकल जाने की हॉर्नर की कहानी बेहद दिलचस्प है।
साल 2017 में जब यह मुकदमा चल रहा था, तब आरोप लगाने वाली हॉर्नर की बेटी ने अदालत में कहा था कि साल 2006 से 2013 के बीच उसके पिता जोशुआ हॉर्नर ने कई बार उसे गलत तरीके से छुआ। पहली बार उसके साथ 5 साल की उम्र में यौन शोषण हुआ। इस उम्र में उसके माता-पिता का तलाक हो गया था। तब से लेकर कई साल तक हॉर्नर ने उसका शारीरीक शोषण किया और कई बार तो उसे पोर्न फिल्में देखने के लिए भी मजबूर किया। लड़की ने अदालत को उस वक्त बतलाया था कि साल 2014 में हॉर्नर ने धमकी दी थी कि अगर उसने इस बारे में किसी को कुछ बतलाया तो वह उसके परिवार और उसके पालतू कुत्ते के साथ बहुत बुरा करेगा।
उस वक्त जब कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने लड़की से पूछा कि हॉर्नर ने पालतू कुत्ते के साथ क्या करने की धमकी दी, तो लड़की ने बतलाया कि हॉर्नर ने इन सभी को जान से मार देने की बात कही। लड़की ने बतलाया कि उसने मेरे सामने मेरे कुत्ते लूसी को गोली मार दी। दरअसल, उसने मुझे फिर से छूने की कोशिश की थी और मैंने विरोध किया, जिसका परिणाम लूसी को भुगतना पड़ा। इस मामले में हॉर्नर की बेटी के बयान ही एक मात्र ऐसे सबूत थे, जिनके आधार पर हॉर्नर को सजा मिल सकती थी। अदालत में मौजूद हॉर्नर उस वक्त बिल्कुल खामोश खड़ा था। हालांकि, थोड़ी देर बाद हॉर्नर ने इतना जरूर कहा था कि लूसी की मौत नहीं हुई है, वो खुद चली गई। लेकिन उस वक्त कोर्ट को हॉर्नर की बातों पर यकीन नहीं हुआ और उस पर यौन अपराध के जितने भी गंभीर आरोप लगे थे, उन सभी मामलों में उसे दोषी मानते हुए 50 साल की जेल की सजा सुनाई गई।
जेल में रहते हुए छह महीने के बाद हॉर्नर ने Oregon Innocence Project के लीगल डायरेक्टर स्टीव वैक्स से संपर्क किया। Oregon Innocence Project एक ऐसा संगठन है, जो निर्दोष लोगों को सजा मिलने से बचाने के लिए प्रयास करता है। हॉर्नर ने स्टीव वैक्स को लूसी के बारे में बतलाया कि लूसी के कान लंबे थे और वो काले रंग की थी। हालांकि, उस वक्त वैक्स को भी नहीं मालूम था कि लूसी जिंदा है या फिर मर गई। हॉर्नर ने वैक्स को बतलाया था कि लूसी अक्सर उसके पड़ोसी के यहां जाकर उनके मुर्गों को मार कर खा जाती थी। इस बात से परेशान होकर उन्होंने उसे एक फ्रेड नाम के शख्स को दे दिया था। उस वक्त लूसी 2 साल की थी। लेकिन मुश्किल यह थी कि हॉर्नर को लूसी के नए मालिक का पूरा नाम और पता मालूम नहीं था।
इसके बाद वैक्स की टीम ने लूसी को खोजने का अभियान चलाया। जांच के दौरान यह पता चला कि फ्रेड का पूरा नाम फ्रेड कोलेमन है। बाद में टीम ने आखिरकार फ्रेड कोलेमन के लोकेशन के बारे में भी पता लगा लिया कि वो अभी पैसिफिक कोस्ट के पास रहते हैं। जब टीम फ्रेड के पास पहुंची तो यह देखकर हैरान रह गई कि लंबे कानों वाली लूसी अभी भी जिंदा थी और अपने नए मालिक के पास काफी खुश भी थी। वॉशिंगटन पोस्ट से बातचीत करते हुए वैक्स ने कहा कि इस तरह के मामले में जहां आपके पास कोई गवाह या फोरेंसिक सबूत नहीं हो, वहां कोई ऐसी चीज हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए, जिसे जज देखना चाहें। आखिरकार, लुसी को खोज निकाला गया और यह बात साबित हो गई कि न तो हॉर्नर ने लूसी को गोली मारी थी और ना ही उसकी बेटी ने लूसी को मरते हुए देखा था। इस मामले में हॉर्नर की बेगुनाही साबित हुई। बीते सोमवार को हॉर्नर के खिलाफ केस खत्म कर दिया गया। Deschutes County District Attorney जॉन हमेल ने निजी तौर से हॉर्नर से माफी मांगी।
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