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असीम मुनीर का नया सिक्योरिटी डॉक्ट्रिन: पाकिस्तान में पुलिस को सेंट्रल कमांड के तहत लाने की तैयारी


पाकिस्तान अपने आंतरिक सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इसके तहत अब पाकिस्तान के सूबों की पुलिस सीधे सेना और सेट्रल कमांड के अंतर्गत काम करेगी। इसे पाकिस्तान की एक नई पंचवर्षीय ‘राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा नीति’ के तहत लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य पूरे देश में पुलिसिंग और कानून को लागू करने वाली एजेसियों को एक इंटीग्रेटेड नेशनल कमांड के तहत सेंट्रलाइज करना है। यह योजना तब लाई गई है, जब पाकिस्तान के कई हिस्सों में अलगाववादी हिंसा, आतंकवादी गतिविधियां और जातीय तनाव चरम पर है।
पाकिस्तान के राज्यों का बुरा हाल – पाकिस्तान में पुलिस सुधार की यह योजना तब चर्चा में है, जब देश का हर सूबा कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का सामना कर रहा है। खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी आतंकवादियों ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। इस सूबे का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे के बाहर है। बलूचिस्तान में अलगाववाद चरम पर है। बलूच लिबरेशन आर्मी हर दिन पाकिस्तानी सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों को निशाना बना रही है। सिंध प्रांत में अपहरण, लूट, डकैती और रंगदारी एक संस्थागत व्यवसाय बन गए हैं। पंजाब सूबे में भी अपराध चरम पर हैं।
असीम मुनीर की सिक्योरिटी डॉक्ट्रिन – News 18 की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्तावित पुनर्गठन के केंद्र में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की एक महत्वकांक्षी योजना है, जिसके तहत पाकिस्तान की कई सुरक्षा एजेंसियों को एक अधिक समन्वित प्रणाली में एकीकृत किया जाएगा। सूत्रों का संकेत है कि सेना के ‘जनरल हेडक्वार्टर’ (GHQ) की तर्ज पर एक ‘पाकिस्तान जनरल पुलिस हेडक्वार्टर’ स्थापित करने पर चर्चा चल रही है, जिसमें ‘राष्ट्रीय पुलिस ब्यूरो’ (NPB) राष्ट्रीय पुलिसिंग रणनीतियों को आकार देने में कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रांतीय पुलिस प्रमुखों से सुझाव मांगे गए – रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय पुलिस प्रबंधन बोर्ड’ की एक महत्वपूर्ण बैठक से पहले प्रांतीय पुलिस प्रमुखों से सुझाव मांगे हैं। इस बैठक में ही इन सुधारों पर चर्चा होने की उम्मीद है। नई मसौदा नीति का उद्देश्य उस समस्या का समाधान करना है जिसे अधिकारी कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के बीच “गंभीर तालमेल की कमी” बताते हैं। इसकी मुख्य विशेषताओं में राष्ट्रीय अपराध डेटाबेस का एकीकरण, प्रांतों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने में वृद्धि, सुरक्षा तंत्रों का मानकीकरण और ‘आतंकवाद-रोधी विभागों’ का गिलगित-बाल्टिस्तान तथा पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर तक विस्तार शामिल है।